जुमानजी २` वेलकम टू द जंगल…

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यह फिल्म लड़ाई,रोमांच और हास्य से लबरेज है,जिसके निर्देशक-जेक केड्सन और कलाकार-ड्वेन जॉनसन,जेक ब्लेक,केवीं हार्ट तथा केरेन गिलेन हैंl इसमें संगीत-हेरी जैकमैन ने दिया हैl दोस्तों १९९५ में आई `जुमानजी` के दूसरे भाग के रूप में यह फिल्म २२ साल बाद आई हैl चूँकि,२ दशक में पूरी दुनिया में तकनीकी तौर पर बदलाव और उन्नति हुई है,तो फ़िल्म में भी होना लाजमी थाl पहले भाग में एक बोर्ड खेल होता है,जो शुरू होता है तो उसका खात्मा ज़रूरी होता हैl उस फिल्म में चुनौतियाँ खेल से बाहर आती थी-मसलन जंगल और जंगली जानवर सब खेल के बाहर आ जाते हैंl

इस भाग में एक बदलाव है कि,खिलाड़ी खुद खेल के अंदर चले जाते हैं और शुरू होता है खेलl रोमांच,एक्शन और हास्य का शानदार तड़का इस फ़िल्म में है,जो पसंद आएगाl जिस प्रकार किसी वीडियो गेम में किसी खिलाड़ी की ताकत और कमियां होती है,इसमें भी ठीक वैसे ही जोड़ा गया हैl पूरी फिल्म से आप लगातार खुद को जोड़ते जाते हैंl

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दृश्य प्रभाव में वीएफ़एक्स का लाजवाब संयोजन दिखाया गया है तो फिल्मांकन भी शानदार हैl ४ उच्चतर शाला के बच्चे इस खेल में अंदर फंस जाते हैं और फिर वो कैसी-कैसी चुनौतियों से जूझते हैं,चारो खेल से बाहर आते हैं या वहीं उनका खेल ओवर हो जाता है,यह जानने के लिए फ़िल्म देखना पड़ेगीl यह फिल्म फंतासी कल्पनाशीलता की अच्छी मिसाल हैl एक अच्छी बात यह है कि २२ साल पहले एलेन पेरिश(रोबिन विलयम्स)कहाँ और कैसे गायब हो गया था,इस राज से भी पर्दा उठाया जाता हैl

यह फ़िल्म न केवल बच्चों को,वरन बड़ों को भी पसन्द आएगीl यह हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों की श्रृंखला वाली फ़िल्म है,जो रोमांच ओर द्वन्द से भरपूर है,इसलिए देखी जा सकती हैl फ़िल्म भारत में अकेले ही प्रदर्शित हुई है,क्योंकि पिछले सप्ताह `टाइगर जिन्दा है` आई है,लेकिन टाइगर के सामने भी यह फ़िल्म अपना जलवा बिखेरने में कामयाब लग रही हैl

                                                      #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।