विश्वगुरु बनाना है…

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shashank sharma1
अंग्रेज़ी शिक्षा का ढांचा,खड़ा किया मैकाले ने,
जैसे सिर पर जूता मारा,लिपटा किसी दुशाले में।
भारत मनीषी बना रहा था,गुरुकल में संस्कारों से,
बना दिया है मशीनों-सा अब,शिक्षा के हथियारों से॥
उसने सोचा संस्कारों का,धीरे-धीरे हरण करो,
सीधे जड़ से भी मत काटो,धीरे-धीरे क्षरण करो।
जैसे-जैसे अंग्रेज़ी,माथे पर चढ़ती जाएगी,
वैसे-वैसे दास बेड़ियां,पैरों में पड़ती जाएगी॥
कान्वेंट की भीड़ से सच,उसका सपना दिखता है,
अपना ही बेटा अब सच में,अंग्रेजों-सा दिखता है।
माना कि इस दुनिया में,स्थान बड़ा वह पाएगा,
माता-पिता की सेवा का,संस्कार कहाँ से लाएगा॥
अच्छी शिक्षा भी दो लेकिन,ऐसा कोई जतन करो,
वह अच्छा इंसान भी बने,ऐसा कोई यतन करो।
वीर शिवा राणा लक्ष्मी-सी राह इन्हें दिखाना है,
अपने भारत को फिर से अब,विश्वगुरु बनाना है॥

                                              #शशांक दुबे

परिचय : शशांक दुबे पेशे से उप अभियंता (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना), छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश में पदस्थ है| साथ ही विगत वर्षों से कविता लेखन में भी सक्रिय है |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।