वोट बैंक के दोनों सौदागर

0 0
Read Time3 Minute, 3 Second
rambhawan
ईद उन्हें मुबारक हो,
होली इन्हें मुबारक हो।
मेरे लिए दो रोटी का,
कोई तो जुगाड़क हो॥
दंगा  उन्हें     मुबारक   हो,
नंगा  इन्हें    मुबारक    हो।
गरीबों  की दुनिया में कोई,
गरीबी    का   उबारक हो॥
मंदिर  उन्हें   मुबारक   हो,
मस्जिद इन्हें  मुबारक  हो।
भूखे का  भगवान भोजन,
तुम मेरा  नहीं पालक  हो ?
सेकुलरिज्म उन्हें  मुबारक ,
राष्ट्रीयता इन्हें मुबारक  हो।
दोनों चाकी में पिसे जनता,
कट्टरता इनका  मारक हो॥
उन्हें रंग लाल मुबारक हो,
इन्हें  रंग  हरा मुबारक हो।
गिरगिट का रंग  दोनों  में,
कौन समाज सुधारक हो ?
देश समाज निज जाति का,
दोनों के  दोनों  बाधक  हो।
वोट बैंक के दोनों  सौदागर,
सत्ता सुख के  साधक हो॥
गला  रेतना तुम्हें   मुबारक,
अधमरा  इन्हें  मुबारक हो।
दोनों  के  बच्चे  हैं भूखे,
तुम पाप दोजख शावक हो॥
दंगे  में  दोनों आताताई ,
किस ईश-खुदा-उपासक हो ?
दोनों देश-समाज के दुश्मन,
भाईचारे  का  नाशक  हो ?
छोड़ो  दोनों  राम-खुदा  को,
राम- खुदा सा बनाना सीखो।
अबला दुबला दीन दुखी को,
भवन भोजन पट देना सीखो॥
प्यासे  को   पानी  पिलाना,
कसम खुदा की  इबादत  है।
भूखे को   भोजन  खिलाना,
ईश्वर  का  पूजा  सत  है॥
मंदिर ना मस्जिद-चर्च मेंं,
ना  ईश्वर   गुरुद्वारा  में।
दीन बन्धु के रोम रोम में,
खुदा कण-कण तारा में॥
                                                        #रामभवन प्रसाद चौरसिया 
परिचय : रामभवन प्रसाद चौरसिया का जन्म १९७७ का और जन्म स्थान ग्राम बरगदवा हरैया(जनपद-गोरखपुर) है। कार्यक्षेत्र सरकारी विद्यालय में सहायक अध्यापक का है। आप उत्तरप्रदेश राज्य के क्षेत्र निचलौल (जनपद महराजगंज) में रहते हैं। बीए,बीटीसी और सी.टेट.की शिक्षा ली है। विभिन्न समाचार पत्रों में कविता व पत्र लेखन करते रहे हैं तो वर्तमान में विभिन्न कवि समूहों तथा सोशल मीडिया में कविता-कहानी लिखना जारी है। अगर विधा समझें तो आप समसामयिक घटनाओं ,राष्ट्रवादी व धार्मिक विचारों पर ओजपूर्ण कविता तथा कहानी लेखन में सक्रिय हैं। समाज की स्थानीय पत्रिका में कई कविताएँ प्रकाशित हुई है। आपकी रचनाओं को गुणी-विद्वान कवियों-लेखकों द्वारा सराहा जाना ही अपने लिए  बड़ा सम्मान मानते हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रेलगाड़ी

Mon Nov 6 , 2017
रेलगाड़ी का सफर, सुन्दर सुहाना मनभावन लगता है। कोई साथी मिल जाए सफर में, सुहाना कटता है। सफर में कभी-कभी, कोई हमसफर मिल जाता है। रेलगाड़ी का सफर बस बात-ही-बात में निकल जाता है। कोई हमसफर हो, कोई हमउम्र हो। नैनों के इशारो से, ही बात हो जाती है। कभी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।