दिल

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puneet mishra

ये ग़ज़ल है मेरी आपका घर नहीं,
इसमें करवट न कोई बदल पाएगाl
मैंने तेरे लिए इक ग़ज़ल लिख दिया,
इसको पढ़ के मेरा दिल सम्हल जाएगाll
ये ग़ज़ल…..
जब तुम्हारे लिए आईना देखता,
तुम हमारे ह्रदय में उतर जाती होl
हुस्न का रंग तुम्हारा निखर जाता है,
बातों-ही-बातों में तुम सम्हल जाती होl
मेरे दिल ने कहा है मुझी से सनम,
न तुम्हारे सिवा कोई आ पाएगाll
मैंने तेरे….
शाम को जब कहीं भी निकलता हूँ मैं,
तेरी यादों की दुनिया उलझ जाती हैl
जब हवाओं के झोंके तुम्हें छूते हैं,
तेरे बालों की जुल्फें सुलझ जाती हैंl
तुम मेरी जिन्दगी में उजाला करो,
मेरा दिल फिर सभी रौनकें लाएगाl
मैंने तेरे….ll

             #पुनीत मिश्र

परिचय: पुनीत मिश्र लेखन में उपनाम-मधुर का उपयोग करते हैंl आपकी जन्मतिथि-११ दिसंबर १९९८ व जन्मस्थान-गोला गोकर्णनाथ हैl बी.एस-सी. करने के बाद आपका  कार्यक्षेत्र-शिक्षा ही हैl आप उत्तर प्रदेश राज्य के शहर गोला गोकर्णनाथ(लखीमपुर खीरी) में ही रहते हैंl आप गीत,ग़ज़ल एवं मुक्तक रचने के अभ्यस्त हैंl कुछ पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं तो,अॉनलाइन कवि सम्मेलन में `काव्य भूषण` सम्मान मिला हैl आपके लेखन का उद्देश्य- शौक एवं हिन्दी भाषा को समाज में जागृत रखना हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।