बादल

0 0
Read Time3 Minute, 55 Second
 ravi rashmi
सावन रितु आई, बरसात की है झड़ी लगाई,
झूले पड़ गए डाली-डाली, हर गौरी है इतराई।
बिजुरी पागल-सी दमक रही, अँगड़ाइयाँ लीं बादल ने,
झूमती-इठलाती गौरी ने, मदमस्त मदमाती पींग बढ़ाई।
मौसम पागल, दीवाना-सा, पहन पायल कैसी हवा चलाई,
रिमझिम बूँदें लगीं बरसने, दामिनी ने ज्योति चमकाई।
अल्हड़ वर्षा ने भी लो, पायल की रुनझुन सुनाई,
और मेघराज ने भी,राग मल्हार की धूनी रमाई।
पायल पहने मस्ताने मौसम से, गरमी ने है मात खाई,
मन-वीणा भी झंकृत हुई और अरमानों की बाजी शहनाई।
मदमाते मौसम की पायलिया ने, मदहोश किया वजूद सारा,
और प्रकृति भी लगी इतराने,चहुँओर हरियाली छाई।
गीतों की धुनें मचल रही हैं, जवानी की अल्हड़ता भाई,
गूँजते स्वर-पड़ गए झूले,सावन रितु आई।
तीज-त्योहार मनाए कोना-कोना, और आँगन हर्षाए,
‘बरसात में हमसे मिले तुम सजन, तुमसे मिले हम’, धुन भाई।
सब ग़म भुलाकर सखियों ने, हरियाली तीज के गीत गाए,
बरसात ने रिमझिम के छेड़ तराने,मधुर- मधुर गीत गाए।
बादलों की गड़गड़ाहट ने, कितने मधुर तराने छेड़ दिए,
हर सजनी को मदमाती-सुहानी रितु में, सजना की प्रीत भाए॥

                                                                 #रवि रश्मि ‘अनुभूति’

परिचय : दिल्ली में जन्मी रवि रश्मि ‘अनुभूति’ ने एमए और बीएड की शिक्षा ली है तथा इंस्टीट्यूट आॅफ़ जर्नलिज्म(नई दिल्ली) सहित अंबाला छावनी से पत्रकारिता कोर्स भी किया है। आपको महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार,पं. दीनदयाल पुरस्कार,मेलवीन पुरस्कार,पत्र लेखिका पुरस्कार,श्रेष्ठ काव्य एवं निबंध लेखन हेतु उत्तर भारतीय सर्वोदय मंडल के अतिरिक्त भारत जैन महामंडल योगदान संघ द्वारा भी पुरस्कृत-सम्मानित किया गया है। संपादन-लेखन से आपका गहरा नाता है।१९७१-७२ में पत्रिका का संपादन किया तो,देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में गीत,ग़ज़ल,कविताएँ, नाटक,लेख,विचार और समीक्षा आदि निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आपने दूरदर्शन के लिए (निर्देशित नाटक ‘जागे बालक सारे’ का प्रसारण)भी कार्य किया है। इसी केन्द्र पर काव्य पाठ भी कर चुकी हैं। साक्षात्कार सहित रेडियो श्रीलंका के कार्यक्रमों में कहानी ‘चाँदनी जो रूठ गई, ‘कविताओं की कीमत’ और ‘मुस्कुराहटें'(प्रथम पुरस्कार) तथा अन्य लेखों का प्रसारण भी आपके नाम है। समस्तीपुर से ‘साहित्य शिरोमणि’ और प्रतापगढ़ से ‘साहित्य श्री’ की उपाधि भी मिली है। अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट द्वारा ‘वुमन आॅफ़ दी इयर’ की भी उपाधि मिली है। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में प्राचीरों के पार तथा धुन प्रमुख है। आप गृहिणी के साथ ही अच्छी मंच संचालक और कई खेलों की बहुत अच्छी खिलाड़ी भी रही हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

परवाज़

Mon Aug 28 , 2017
उम्दा  मोहब्बत   परवाज़   करते हैं, वो जो इंकार से  आगाज़   करते हैं। मुझे देखते ही जो नजर फेर लेते हो, क्या बेरुखी का वो रियाज़ करते हैं। मतलब की है दोस्ती मतलबी जहां, गरज निकलते ही  नाराज करते हैं। गमों में मेरे  खुश  हो जाते  हैं रिश्ते, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।