सूरज

Read Time5Seconds
 cropped-cropped-finaltry002-1.png
सूरज लालिमा अपनी बिखराता,
फिर से सूरज आ रहा है
आँखों की बाकी नींदों पर,
फिर उजाला छा रहा है,
फिर  से   सूरज…l
भोर का सुन आगमन तब,
चिड़िया सब उड़ने लगी फिर
खिलखिलाती धूप निकली,
खिड़कियाँ खुलने लगी फिर
हर तरफ का शोर सलोने,
सपनों को उलझा रहा है,
फिर  से   सूरज…l
बसंत मास की सुबह सुहानी,
इतनी धूप कहाँ से आई
धीरे-धीरे पवन चल रही,
हर्षित रूप कहाँ से लाई
सूरज आसमान पर चढ़कर,
सबको आँखें दिखा रहा है,
फिर  से  सूरज…l
आ गई  दोपहर मतवाली,
माँ  के तारे माँ से दूर थे
स्कूल से घर को आने में,
बच्चों के मन  चूर-चूर थे
देख-देख बच्चों की पावस,
सूरज नजरें चुरा रहा  है,
फिर  से  सूरज…l
शाम की पावन बेला में,
मन कहीं भी ठहर न पाए
इस मोहिनी शाम की फिर,
अब कोई भी सुबह न आए
सब  हुए  उदास पल  में,
फिर अंधेरा छा रहा है,
फिर  से  सूरज…l
                                                                             #अजीत कुमार लोधी
परिचय: अजीत कुमार लोधी की जन्मतिथि १८ जुलाई १९९९ तथा जन्म स्थान-मुम्बई(महाराष्ट्र) है l आपने स्नातक करके कार्यक्षेत्र के लिए शिक्षा को चुना हैl नई पीढ़ी को हिन्दी का महत्व समझाना और सामाजिक क्षेत्र में हिन्दी का विकास करना आपका उद्देश्य हैl  विधा-श्रृँगार (वियोग) में रचते हैं l विश्वगुरू भारत परिषद सम्मान-२०१७ पाया है l आपके लेखन का उद्देश्य है कि,अपनी पीढ़ी को बताना चाहते हैं कि,वो मातृ भाषा का सम्मान करें l 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मैं दीमक हूँ

Wed Aug 9 , 2017
हाँ में दीमक हूँ, घर दिवारों पर खिड़कियों पर, किताबों में पुरानी समानों पर मिट्टी के अन्दर अपना रैनबसरे बना लेती हूँ, धीरे-धीरे फैलती जाती हूँ जैसे बरगद की लताएं हों। मैं कहीं भी जाऊँ, अपना स्थान घेर लेती हूँ या यूँ कहें एक सुरक्षित दायरा बना लेती हूँ, मैं […]

You May Like

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।