पहरेदारी करिए

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उल्टे-सीधे कागज़ भर के यों मत बटुवा भारी करिए।
अब घंटी बजने वाली है,चलने की तैयारी करिए॥
मीठा बोलो और सभी के मन में अपना करो ठिकाना।
ज्यादा दिन तक कौन रहेगा,फिर क्यों थानेदारी करिए॥
गंदले जल के स्रोत प्रदूषित करने को आतुर लगते हैं।
करना है तो पावन गंगा जल की पहरेदारी करिए॥
जिसके एक इशारे भर से भटकन छू मन्तर हो जाती।
उस भीतर वाले से भैये कम-से-कम गद्दारी करिए॥
नन्हें दीपक की लौ तो रोशनियों के मोती उगलेगी।
आप अँधेरे के खिलाफ हैं,ये बयान तो जारी करिए॥
                                                                #राम अवतार शर्मा’इन्दु’
परिचय :राम अवतार शर्मा का साहित्यिक उपनाम-‘इन्दु’ है। उत्तर प्रदेश राज्य से नाता रखने वाले श्री शर्मा की जन्म तिथि २७ जुलाई १९५३ और जन्म स्थान बजरिया निहालचंद (फर्रुखाबाद) है। वर्तमान में भी आप शहर फर्रुखाबाद में ही निवासरत हैं।आपकी शिक्षा परास्नातक और अध्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश है। आप प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होकर सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेखन विधा-कविता,समीक्षा,गद्य तथा निबंध है। प्रकाशन में आपके खाते में पांडवेश्वर शतक, त्यागमूर्ति मंथरा एवं दशरथ आदि है, तो १२ अप्रकाशित पुस्तकें हैं। विविध संस्थाओं द्वारा अनेक सम्मान दिए गए हैं,जिसमें छंद सम्राट की उपाधि बड़ी उपलब्धि है। आपके लेखन का उद्देश्य जनजागरण ही है। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।