नोटबंदी

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भागवत शामराव पाटील

अब मुट्ठीभर बेईमानों को बेनकाब करनेवाली

कालेकुबेरों के जाल से  लक्षमी को मुकत करनेवाली

आठ नवंबर सोलाह की निशा मे मोदीजी ने गर्जना कर दी

काल बनकर आयी कालेकुबेरों के लिए नोटब॔दी॥1॥

 

रजनी में कंचन-रजत की सहसा चमक बढ़ गई

कालेकुबेर-बेईमानों के चेहरे से चमक उज़ड गई

कालेकुबेर-बेईमानों की खैर नही अब होगीं नाकाबंदी

कालेकुबेर-बेईमानों को ना बख्शेंगी ना छोड़ेगी नोटबंदो ॥2॥

 

दीन-इमानदारों को कालेधन और भष्टाचार से मुक्ती देनेवाली

सशक्त भारत के निर्माण में देशवासीयों का विश्वास जीतनेवाली

पाँचसो -हजार की जंग में परास्त जाली,आतंकी,नक्सलवादी

धूप-सर्दी में दिनरात कतारों में खड़े होकर स्वीकारी नोटबंदी॥3॥

 

बैंक के दप्तरों में चंद बेईमान अफ़सरों की दलाली शुरू हुई

प्यारी गुलाबी की हेराफेरी तिसरी आँख में कैद हो गई

कालेधन को सफ़ेद करने की होड़ में घूसखोरों की चाँदी

अब कालेकुबेर-बेईमानों की शुरू हुई नापाक जूगलबंदी ॥4॥

 

चायवाले के पचास दिनो की पहल से विपक्षों का शोर

भजियावाला हो या मिठाईवाला बेनकाब कालेधन के चोर

दीन-इमानदारों की लक्ष्मी के लूटेरों की शुरू हुई बर्ब़ादी

दीन औरअमीरों की विषमता मिटाने मोदीजी लाए नोटबंदी॥5॥

 

एटीएम-पेटीएम,आधार,भिम से कैशलेस बनेगा डिज़िटल इंडिया

भारत सोने की चिड़ियाँथा,फिर से

बनेगा सोने की चिड़ियाँ

दृढ विश्वास,विशाल जनसमर्थन से मिलेगी कालेधन से आझाद़ी

इतिहास के सुवर्ण पन्नो में अंकित होगी मोदीजी की नोटबंदी ॥6

 

कवि परिचय : कवि भागवत शामराव पाटील बतौर शिक्षक होने के साथ साथ काव्य सृजन में भी सक्रिय है |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।