रिमझिम फुहार

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rachana sacsena
न कहीं धूप,न कहीं अब छाँव है, 
दिख रही  रिमझिम फुहार है।
 
बगीचे तले डाली-डाली फूल झूमे,
आपस में लिपट-लिपट गाल चूमे..
तितलियाँ रँगीली इधर-उधर घूमे,
डालियाँ लताएं भी सारे गम भूलेl 
 
क्यारियों में डूबे जहाँ सूखे पाँव है,
वहीं दिख रही रिमझिम फुहार है।
 
सड़कों पर भी छतरी नीचे जोड़ियाँ,
प्रेमरंग खेल खेलें,आपस में होलियाँ..
भीगी-भीगी काली झूमती चोटियाँ,
छपछपाती पानी में उनकी जूतियाँ,
 
एक-दूजे खोए जहाँ प्यासे भाव हैं,
वहीं दिख रही रिमझिम फुहार है।
 
अपना भीे ये नाजुक मन बेचैन  है,
न कटे दिन और न कटे अब रैन है..
रूठा है प्रेम बस विचारों का मेल है,
डबडबाते आँसू और गीले दो नैन हैl 
 
पलकों नीचे तैरती पुतलियाँ नाव है,
वहीं दिख रही रिमझिम फुहार है।
                                                                                               #रचना सक्सेना
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।