बेटी का सम्मान करो

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kishor saklani
जुल्म न करो तुम बेटी पर,प्यार करो सम्मान दो..
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्हीं-सी जान को।
बेटी घर की मुस्कान है, बेटी घर की शान है..
जीने दो आजादी से,
क्या इसने किया गुनाह है..
दुनिया के संग चलने दो, पाएगी अपनी पहचान को
नाम करेगी रोशन,
छुएगी आसमान को।

जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो..
प्यार करो,गले लगा लो, इस नन्हीं-सी जान को।

पढ़ा-लिखा बेटी को,

बेटी का सम्मान करो..
मत छीनो प्यारी-सी मुस्कान,
न बेटी का अपमान करो..
सोच बदल दो तुम दुनिया की,
बेटी को पहचान दो..
जानबूझकर अंजान बन रहा,
समझा दो उस नादान को।

जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो..
प्यार करो,गले लगा लो, इस नन्हीं-सी जान को।

दुनिया माँ कहती है जिसे,

बेटी उस माँ का ही रूप है..
दया भाव है माँ के हृदय में,
बेटी उस ममता का रूप है..
बेटियों को काबिल बना, खुद पर तुम गर्व करो..
दुनिया वाले क्या कहेंगे, दुनिया वालों से न डरो..
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो..
प्यार करो,गले लगा लो, इस नन्हीं-सी जान को॥
                                                                                                        #किशोर सकलानी

परिचय :२६ वर्षीय किशोर सकलानी उत्तराखंड के चम्पावत जिले के सकदेना गाँव में रहते हैं | आपकी शिक्षा १२वीं तक हुई है| वर्तमान में दिल्ली के जहाँगीर पूरी में निवास है| स्टील पाइप के कारखाने में पर्यवेक्षक पद पर कार्यरत हैं|

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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