मेरे पिता…

Read Time0Seconds

कई बार एक साथ कई सारी चीजे करने का मन करता है ।जब स्कुल में थी तो पिता अक्सर कहते थे की खुदी को कर बुलंद इतना की तक़दीर से पहले खुद बन्दे से ये पूछे बता तेरी रजा क्या है …तमाम मिट चुकी स्मृतियों के बीच बस यही याद बाकि है कि कितना बुलंद किया है खुद को … आज भी अस्तित्व की जद्दोजहद जारी है अजीब विरोधाभासी व्यक्तिव जुड़ते बिछड़ते रहे कई बार अनुकरर्णीय भी जिन्होंने दिशा देने में मदद की कई बार वक़्त आजमाता रहा कभी वक्त पर लोगो को भी आजमाया मैंने चहरो से लिपटा अपनत्व का मुख़ौटा भी उतरा कई बार अपनों का भी और परायो का भी …
तब दिल में आया की
आज फिर से आजम ले ऐ वक़्त तू मुझे
कर ले सितम जो तेरी हद में हो ..
लेकिन पिता की कही ये दो लाइने की खुदी को कर बुलंद …
आज भी मेरे कानो में मेरे दिल में बसी है जो जीने की ललक को न हारने की जिद को मुझमे जिन्दा रखे है ।

 लेखिका परिचय : कीर्ति कापसे जी एम ए (हिस्ट्री), मास्टर आफ जर्नलिज़्म |
लेखन में रूचि तो लंबे समय से है ,ब्लॉग ,कविताएं , संस्मरण, कहानियां लेखन में रूचि साथ ही राजनितिक टिप्पणियाँ लिखना भी आपकी पसंद में शुमार है । गत 18 वर्षो से कार्यरत हूँ जिनमे 7 वर्ष शैक्षणिक सेवाएं दी ।10 वर्ष दैनिक भास्कर में मार्केटिंग में विभिन्न विधा में काम किया व गत एक वर्ष से नई दुनिया में सीनियर मेनेजर के पद पर कार्यरत है |

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मैं कवि नहीं हूँ

Wed Dec 21 , 2016
दिल से जो आवाज़ निकलती,वही कहता हूँ। कोरे कागज़ पर स्याह रंग से,कुछ लिखता हूँ। मैं हूँ एक छोटा सा दीपक,रवि नहीं हूँ सच बताऊँ मैं कोई,कवि नहीं हूँ।। जीवन के मकड़जाल में,उलझा रहता हूँ। अनुभव के शब्दजाल,बुनता रहता हूँ। मैं हूँ साधारण सा,बड़ी छबि नहीं हूँ। सच बताऊँ मैं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।