प्रतिकार वंदेमातरम्

Read Time2Seconds
pradeepmani
जोश में भी,होश है,जयकार वंदेमातरम्,
धूल दुश्मन को चटा,प्रतिकार वंदेमातरम्।
पाक की नापाक हरकत,हम सहेंगे अब नहीं,
तोप गोलों से,ग़ज़ब की मार वंदेमातरम्।
अब युवा भारत नहीं,लाचार वंदेमातरम्,
चाइना  को  दें  मिटा,संहार वंदेमातरम्।
अब न सन् बाँसठ कभी,फिर से दुबारा भूल जा,
बम,मिसाइल,तोप की,बौछार वंदेमातरम्।
शाम सुबहो घंटियाँ,घनकार वंदेमातरम्,
चाइना  से  ज़ंग,आरो पार  वंदेमातरम्।
पाक को भी दो मिटा,आतंक मिटना चाहिए,
युद्ध का तांडव मचे,टनकार वंदेमातरम्।
हम चले हैं वक्ष अपना,तान वंदेमातरम्,
मान है  सम्मान है,ये  गान  वंदेमातरम्।
दे रही है आसरा,माँ भारती निज गोद में,
हम सभी का मान है,अरमान वंदेमातरम्।
                                                         #प्रदीपमणि तिवारी ‘ध्रुवभोपाली’
परिचय:भोपाल निवासी प्रदीपमणि तिवारी लेखन क्षेत्र में ‘ध्रुवभोपाली’ के नाम से पहचाने जाते हैं। वैसे आप मूल निवासी-चुरहट(जिला सीधी,म.प्र.) के हैं,पर वर्तमान में कोलार सिंचाई कालोनी,लिंक रोड क्र.3 पर बसे हुए हैं।आपकी शिक्षा कला स्नातक है तथा आजीविका के तौर पर मध्यप्रदेश राज्य मंत्रालय(सचिवालय) में कार्यरत हैं। गद्य व पद्य में समान अधिकार से लेखन दक्षता है तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते हैं। साथ ही आकाशवाणी/दूरदर्शन के अनुबंधित कलाकार हैं,तथा रचनाओं का नियमित प्रसारण होता है। अब तक चार पुस्तकें जयपुर से प्रकाशित(आदिवासी सभ्यता पर एक,बाल साहित्य/(अध्ययन व परीक्षा पर तीन) हो गई है। 
यात्रा एवं सम्मान देखें तो,अनेक साहित्यिक यात्रा देश भर में की हैं।विभिन्न अंतरराज्यीय संस्थाओं ने आपको सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त इंडो नेपाल साहित्यकार सम्मेलन खटीमा में भागीदारी,दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी भागीदारी की है। आप मध्यप्रदेश में कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।साहित्य-कला के लिए अनेक संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

गुज़रा हुआ ज़माना...

Mon Jul 3 , 2017
हमें न ज़ोर हवाओं से आज़माना था, वो कच्चा धागा था उसको तो टूट जाना था। वो मेरे ज़हन में ढलता गया ग़ज़ल की तरह, मिरा मिज़ाज ही कुछ ऐसा शायराना था। हरेक शख़्स की आँखों में हम ही रहते थे, हमारे पास जो उनका भी आना-जाना था। ये और […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।