कुछ जीते हैं कुछ हारे हैं सभी के विकास नारे हैं लोकतंत्र के पर्व में टिमटिमाते सभी ये तारे हैं। गिर के उठना फिर सम्भलना जीवन हमें सीखाती है। कभी जीत मिली कभी हार जीवन पाठ पढ़ाती हैं। मतभेद को मनभेद न करना जनादेश यही अब कहती है, मिलकर सारे […]

अर्कान-1222×4-मफाईलुन-मफाईलुन-मफाईलुन-मफाईलुन. शहीदों की चिताओं में लगें मेले मुनासिब है। शहादत को रखेंगे याद मुमकिन यार वाज़िब है।-01 रखें महफूज़ सरहद को यकीनन जान से खेले, जमाना ये कहे सैनिक बड़ा अय्यार साहिब है।-02 शहादत भी वतन के वास्ते ज़न्नत हुआ करती, तलब हो जब हिफाज़त की वही तो यार तालिब […]

है अद्भुत अदम्य मलंग मलखम्भ ये वीर बाला मस्त निहाल हैं इनके कौशल से दंग सभी भारत के ये ही शान है। है ध्यान योग में माहिर नवनीत खेल दिखाते हैं इनके अंग संचालन में दिव्य जोश रगों में आते हैं वीर बालाएं डोर पर अद्भुत खेल दिखाती हैं। सिरसाषन […]

राम केवल नाम नही राम जीवन का आधार है। राम है संस्कृति हमारी राम जड़ चेतन का व्यापक विस्तार है। उद्घोष जय श्री राम का संचरण ऊर्जा का उदगार है जिसे लगता युद्धघोष यह वो विक्षुब्ध एक विकार है। हिंसा को तुम धर्म से जोड़े जिसका आधार आहिंसा परमो धर्म: […]

गांधी फिर कब आओगे जनमानस के सुप्त पटल से छुद्र स्वार्थ हटाओगे। बापू क्या फिर आओगे।। जाति पाती ही ध्येय बना धर्म के ठेकेदारों का मन्दिर मस्जिद में जूझे जनता खेल वोट बंटवारे का सत्य अहिंसा नारे बन गए जनता को भरमाने का।। बढ़ती पशुता नग्नता सी कैसी वैचारिक विषमता […]

हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं,बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट,हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम हैं। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे जुड़ाव रखती है और हम भी मां हिन्दी के बिना अपने अस्तित्व की कभी कल्पना नहीं कर सकते। क्योंकि मां के बिना बेटे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।