अजीब दौर है..

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ashok sinhasane
किसी ने देखा नहीं अस्ल में चेहरा अपना,
सबको एजाज़ दिखाता है आइना अपना।
मज़ीद सरफिरे लोगों ने बना ली सरहद,
भूलकर आदमी से आदमी रिश्ता अपना।
फैसले क्या है हमारी ही कम ख्याली है,
हमने तो सोचा नहीं खुद कभी सोचा अपना।
वो भी अब नुक्ताचीं हो गए बुलंदी के,
पढ़ नहीं सकते जो लोग खुद लिखा अपना।
हमने तो चूजों-सा पाला है अपने ख़्वाबों को,
बुना है मुश्किलों से लड़ के घोंसला अपना।
अच्छा है आप भी दुश्मन से पेश आने लगे,
रहेगा यूँ भी मुकद्दर से सिलसिला अपना।
अजीब दौर है हैरानियाँ भी पागल हैं,
छू नहीं सकते खुद यार हम पैसा अपना।
हम पे मसरुफियत बाजार में भी हँसती है,
हुआ बेजान पसीने से कुरता अपना।
                                                                         #अशोक सिंहासने ‘असीम’
परिचय : अशोक सिंहासने लेखन जगत में ‘असीम’ नाम से लेखन करते हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं से पदाधिकारी के रुप में जुड़े हैं। साथ ही एक मासिक पत्रिका के प्रबंध संपादक और मनु प्रकाशन के संरक्षक भी हैं। आपका निवास वार्ड न. २२ सोगपथ(बालाघाट म.प्र.) में है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।