लौट आओ ना

Read Time1Second

aparna thapaliya

खिडकी से दिखता
छायादार पेड अब भी वहीं खडा है
वह हरा भी है
और उसकी शाख पर
झूला भी पडा है
परन्तु हृदय व्यथित है
सुबह सवेरे गोरैया का कलरव नहीं
कान में गिलहरियों का
कट कट कट कट स्वर पडा है
हैरान हूँ सब कहाँ गुम हो गई ं
उनकी चहचहाहट वाली
मंगल ध्वनि कहीं खो गई
विधाता की इस अनमोल देन की
क्षति देख ,हृदय में शूल सा गडा है
खिडकी से दिखता
वो हरा पेड तो वहीं खडा है
लेकिन पत्ते उदास से लगते हैँ
फूल भी हताश से दिखते हैं
शाखों पर उनके बीच फुदकता
नगीना अब वहाँ नहीं जडा है
पेड से उतर उतर वो गौरैया
मेरे एक दम करीब तक आ जाती थी
पास बिखरे दाने चुनने में
जरा भी नहीं लजाती थी
अब सीलिंग के छेद में
बना घोंसला नितांत उजडा है
बिखर गये हैं तिनके
मन को गहरी उदासी ने जकडा है
लौट आओ प्यारी गौरैया
अपना आशियाँ वापस सजाओ ना
मेरा सूना आँगन आज भी
इसी आस में खुला पडा है
खिडकी के बाहर वाला पेड भी
तेरे इंतजार में बाहें पसारे खडा है
हमेशा के लिए तेरे खो जाने के डर से
हम सबके चेहरों का रंग उडा है
प्यारी गौरैया वापस लौट आओ ना
खिडकी से दिखता हरा भरा पेड
अब भी वहीं खडा है ।।।।।

#अपर्णा थपलियाल “रानू”

नाम:-अपर्णा थपलियाल “रानू”
अभिरुचि:-लेखन (कविता,लघु कथा,लेख,संसमरण इत्यादि)
जन्म स्थान:- देहरादून
पता:- गाजियाबाद(उत्तरप्रदेश)

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ग़ज़ल

Mon Jul 16 , 2018
  ताउम्र के लिए सितम मेहमान हुआ मेरा खाली ज़मीन खाली आसमान हुआ मेरा कुछ आरज़ू नहीं है और जग के मालिक सब जग से छूटा मगर भगवान हुआ मेरा ग़म नही शहंशाह के बाशिंदों की दूरी से जिसका सब कुछ सारा जहान हुआ मेरा उसकी अदा में अब तक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।