कोविंद का राष्ट्रपति बनना

0 0
Read Time3 Minute, 20 Second
vaidik
बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद अब भारत के राष्ट्रपति होंगे। वे भाजपा के उम्मीदवार घोषित हो गए हैं तो उनकी विजय निश्चित ही होगी। कोविंद का नाम जैसे ही टीवी चैनलों ने उछाला,बहुत से पत्रकार-बंधुओं के फोन आने लगे और वे पूछने लगे कि यह कोविंद कौन हैं ?
संयोग की बात है कि, रामनाथ कोविंद और मेरा परिचय लगभग 50-52 साल पुराना है। यह उन्होंने ही मुझे बताया था। उस समय वे किसी भी दल में नहीं थे। वे कानपुर से दिल्ली आ गए थे और यहां कानून की पढ़ाई करते वक्त कई बड़े नेताओं के साथ वे काम भी करते थे। जब अपने हिन्दी शोधग्रंथ संबंधी विवाद के संबंध में मैं बड़े नेताओं से मिलने जाता था तो उनके घर पर इनसे भेंट होती थी। उनकी यह विनम्रता और सहजता है कि,पिछले कुछ वर्षों में वे मुझसे मिलने मेरे गुड़गांव के नए निवास पर भी आते रहते थे। मैं पिछले दिनों पटना गया तो उन्होंने वहां राजभवन में भी गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कोविंद के आपसी संबंध भी मधुर रहे हैं। इससे यही अंदाज लगाया जा सकता है कि,मोदी-कोविंद संबंध कितने अच्छे रहेंगे। पटना में कोविंद से मिलने के पहले मैं नीतीश से मिला था। उनके मुंह से राज्यपाल की तारीफ सुनकर मुझे अच्छा लगा था।
कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर कई लोगों को अचरज हो सकता है,क्योंकि उनका नाम इतना प्रसिद्ध नहीं है और उसका कहीं जिक्र भी नहीं था,लेकिन वे देहात में जन्मे हैं और अनुसूचित जाति के हैं। वे वकालत करते रहे हैं। वे
भाजपा के राज्यसभा में सदस्य रह चुके हैं और अनेक समाजसेवी संगठनों के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके राष्ट्रपति बनने का जो भी विरोध करेगा,उस पर दलित-विरोधी ठप्पा लगेगा। इसके अलावा उन पर कोई भी सांप्रदायिक संकीर्णता का आरोप नहीं लगा सकता। उनका जीवन निष्कलंक और अविवादास्पद रहा है। वे विचारशील व्यक्ति हैं।
वे विनम्र और मधुरभाषी जरुर हैं,लेकिन उन्हें कोई रबर का ठप्पा मानकर नहीं चल सकता। कोविंद जागृत विवेक के व्यक्ति हैं। वे कानूनदां है और उत्तरप्रदेश जैसे बीहड़ प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रपति के दायित्व,मर्यादा और गरिमा को वे अच्छी तरह समझते हैं। मुझे विश्वास है कि कोविंद एक अच्छे राष्ट्रपति सिद्ध होंगे।
                                                                                                  डॉ. वेदप्रताप वैदिक

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पाक को जरा..

Tue Jun 27 , 2017
पाक को जरा,सब सिखाइए। गीत प्यार के,सरस गाइए॥ शक्तिमान हो,शरण दीजिए। देश द्रोहि के,करम  कीजिए॥ प्राण खींच लो,तब सही रहे। बाप हो तभी,जब वही कहे॥ धीर  देश  है,भरत  वीर का। भीष्म पार्थ के,विकल तीर का॥ आँख जो उठे,तुरत नष्ट हो। मौत से मिलो,अगर भ्रष्ट हो॥ सोच लो अभी,समय दे दिया। […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।