तन्हा जीवन

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dashrathdas

यह जीवन बड़ा अलबेला है,अपनों का यहाँ झमेला हैl
यहाँ नित काफिले सजते हैं,आदमी फिर भी अकेला हैll
इस धरती पर जब तू आया,देखा तन्हा तू रोया हैl
भाँति-भाँति के रिश्ते बना,अजब-सा खेल खेला हैll
यह जीवन बड़ा………..l

 

जिसने भी तुझको जन्म दिया,पाल-पोसकर बड़ा कियाl
जब बुढ़ापा आया उन पर,फिर काहे तन्हा छोड़ दियाll
हाथ पकड़कर ढूँढ लिया साथी,

तू कितना मन का मैला हैll

यह जीवन बड़ा…………l

 

संग जिसके शादी रचाई,हँसी-ख़ुशी के सपने देखे।
धन की जब आई कठिनाई,परदेशी बना बिस्तर ले केll
छल-कपट से ही धन कमाया,

हाथ लगा न तेरे  ढेला हैll
यह जीवन बड़ा……….l

 

चलने की जब बारी आई,जेब टटोला सबने मिलकरl
संगी-साथी मरघट तक आए,तन्हा `दशरथ` अब जाना चलकरll
घर आए पकवान बनाए,

तेरहवाँ मना रंगीला हैll
यह जीवन बड़ा……….ll

             #दशरथदास बैरागी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।