जरूरी था

Read Time4Seconds

babulal sharma
.               🌹🌹
ध्रुवकवि,कवि कुल भूषण,
देश हितों  में वह युग पुरुष,
तब आना बहुत जरूरी था,
वह महानायक विश्व पटल,
दैव हितों में वह महा पुरुष,
फिर जाना और जरूरी था।
🌹🌹
हे जन नायक  राष्ट्रपूत प्रिय,
इस पावन भारतभू आँचल।
कोटि  कोटि जन  मन  हित,
जैसे अडिग  महा हिमाचल।
राष्ट्र एकता  रखने   खातिर,
जब  वातावरण  सरूरी  था,
तब आना  बहुत जरूरी था।
🌹🌹
हे अटल बिहारी  वाजपेयी,
हे  भारत  माँ  के महा पूत।
जब मातृभूमि बंदिश में थी,
सह रही अत्याचार  अकूत।
उन छालों को  सहलाने को,
तब  तेरा जनम  जरूरी था,
तब आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
अंग्रेजों  का प्रबल  जोर  था,
संघर्षण  का कठिन दौर था।
जागा  भारत  जागी  जनता,
आजादी  का नवल बौर था।
सरकारों  के  सबल  शोर में,
सहज   विपक्ष   जरूरी  था,
तब आना  बहुत जरूरी था।
🌹🌹
शासन  सरकारी  सत्तापोशी,
नेताओं  में ही  हो  मदहोंशी।
दल  दलदल बन  खदक रहे,
तब कौन दिखाए सत होशी।
निरंकुशों  पर  अंकुश रखने,
जब प्रबल विरोध जरूरी था,
तब  आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
सरकारों   की  ना  इंसाफी,
दलीय  फूट फैलती  काफी।
राजधर्म की कठिन घड़ी में,
जनता भी खो धीरज हाँफी।
जनगण मन की इच्छापूरित,
जब कंटक ताज जरूरी था,
तब आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
षडयंत्र विदेशी गहराए होते,
सीमा पर टकराव नित होते।
भारतरत्न का फर्ज निभाना,
धैर्य अटल कभी नहीं खोते।
विश्व मंच चढ़ जाने  खातिर,
जब परमाणु बम जरूरी था,
तब आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
करगिल  घाटी  सुलगी थी,
भारत माँ  वेदी  मचली थी।
तब भारत रत्न  हूँकार भरे,
सेना भी हमारी सजती थी।
करगिल  विजय के संग में,
अरि  पर खौफ जरूरी था,
तब आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
जीवन समर समर्पित करना,
देश के अपने धार में चलना।
तूफानों से कब क्यों घबराएँ,
सतत राष्ट्र चिंतन रत रहना।
समय नजाकत  चिन्हित हो,
दमभी दिखलाना जरूरी था,
तब आना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
धरती पर ध्रुव अटल कहाएँ,
ये अटलध्रुव पटल पर छाए।
सत कर्मो  सद  व्यवहारो़ंं से,
अटलध्रुव गगन ही पा जाए।
छितिजलपावकगगनसमीरा,
जीर्ण महल जब हुये शरीरा।
फिर मौसम खूब सरूरी था,
तब जाना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
अब भी तो फर्ज सिखाने है,
जब स्वर्गिक बने ठिकाने है।
अगले जन्म की तैयारी कर,
देश से भावि नेह निभाने है।
अटल हर कदम गरूरी था।
जब  परम धाम जरूरी था।
तब जाना बहुत जरूरी था।
यह  गाना बहुत जरूरी था।
यह  गाना बहुत जरूरी था।
🌹🌹
🌹🌹🌹🌹🌹

नाम बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शत शत नमन

Fri Aug 17 , 2018
शत शत नमन है उस, मेरे देश के वीर सपूत को, सारा देश रो रहा है उस, देश के अटल पूत को। राजनीतिज्ञ कहूं या दार्शनिक, या कह दूं उसे कवि, भारत देश के लिए था वो, एक चमकता हुआ रवि। मरते मरते भी जिसने,  ध्वज को ना झुकने दिया, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।