
इंदौर। ढाई आखर और जीवन शाला के संयुक्त तत्वावधान में विसर्जन आश्रम में ‘ढाई आखर’ का नवां आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत किशोरी कबीर गायिका हंसिका के सुमधुर भजन से हुई। इसके बाद खेलों के माध्यम से आपसी परिचय कराया गया। सुरेश पटेल ने ढाई आखर की अवधारणा बताते हुए कहा कि यह कला प्रेमियों और कलाकारों का साझा मंच है, जहाँ कला के माध्यम से संविधान के मूल्य और निर्गुण चिंतन पर संवाद होता है। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘व्यंजनों में विविधता’ रहा, जिसका प्रवर्तन नेहा पटेल ने किया। इसमें भारतीय भोजन की विविधता और सांस्कृतिक एकता पर चर्चा हुई। चारूशीला मौर्य की लघुकथा ‘चॉकलेट’, सुब्रोतो बोस की ग़ज़ल, सुधीर लोखंडे की कविताएँ और रोहित ने एक हड़बड़ी रे हड़बड़ी….गीत प्रस्तुत किया। अजय टिपानिया व लाखन मंडलोई के भजन आकर्षण का केंद्र रहे। पूजा कुशवाह ने संविधान की उद्देश्यिका का पाठ कराया और छोटेलाल भारती ने आभार व्यक्त किया। समापन दीपावली के व्यंजनों के साथ हुआ। कार्यक्रम में 60 से अधिक विविध कलाकार एवं कला प्रेमियों की भागीदारी हुई।

