कोई नहीं लिख पाया…

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मात-पिता की महिमा वो जो,कोई नहीं लिख पाया है।
माँ  ममता  की  देवी  जग में,पिता सदा सुख साया है।
मैंने नन्हें कदम रखे जब,सबने खुशी मनाई थी।
बहुत दिनों के बाद आज इस,आँगन खुशियां आई थी।
नाक नक्श सब गए मात पर,पिता रूप तन पाया है।
माँ ममता की देवी जग में,पिता सदा सुख साया है॥
रखता था जब मैं पग नन्हें,पिता देख खुश होते थे।
ठोकर खा,गिर पड़ता जब मैं,तब बापू ही रोते थे।
गिर ना जाऊँ पुनः कहीं पर,चलना मुझे सिखाया है।
माँ ममता की देवी जग में,पिता सदा सुख साया  है॥
खुद ने छोड़ा सुख का दामन,मुझको सब सुविधाएं दी।
नैतिक शिक्षा,से सामाजिक,सारी रस्म अदाएं की।
कमी खले न किसी चीज की,चाहा वही दिलाया है।
माँ ममता की देवी जग में,पिता सदा सुख साया है॥
                                                                          #नवीन श्रोत्रिय ‘उत्कर्ष’
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।