व्यंग्य की बात, गिरीश पंकज के साथ आयोजित

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व्यंग्य का स्थान अख़बारों में ज़रूरी- गिरीश पंकज

इन्दौर। ‘व्यंग्य का अख़बारी दुनिया में बहुत महत्त्व है, बिना व्यंग्य के समावेश के अख़बार अधूरा माना जाता है। इसी के साथ वर्तमान दौर में साहित्य पत्रकारिता को भी पुनर्जीवित करना आवश्यक है।’ उक्त बात रायपुर से पधारे व्यंग्य श्री, वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने इंदौर प्रेस क्लब में साहित्यकारों से चर्चा के दौरान कही।
श्री गिरीश पंकज का स्वागत प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने किया व क्लब की ओर से भगवत गीता भेंट की गई।

इन्दौर के साहित्य जगत के साथ चर्चा करते हुए ख्यात व्यंग्यकार व वरिष्ठ संपादक रहे गिरीश पंकज ने कहा कि ‘इस समय व्यंग्यात्मक शैली का बड़ा महत्त्व है, कहीं कार्टून के माध्यम से तो कहीं लेखन के माध्यम से कटाक्ष आवश्यक है।’

चर्चा का संचालन मुकेश तिवारी ने किया व आभार मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने माना।

चर्चा में ख्यात कार्टूनिस्ट इस्माइल लहरी, वीणा के संपादक राकेश शर्मा, विचार प्रवाह साहित्य मंच की अध्यक्ष सुषमा दुबे, वामा साहित्य मंच की अध्यक्ष अमरजीत कोर चड्डा, प्रेस क्लब कार्यकारिणी सदस्य अभय तिवारी, साहित्यकार रमेश चंद्र शर्मा, कवि गौरव साक्षी, प्रीति दुबे, दामिनी सिंह ठाकुर, वाणी अमित जोशी व रोहित त्रिवेदी सहित शहर के पत्रकार व साहित्यकार शामिल हुए।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।