खामोश-सा एक बादल

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कभी खामोश सा एक
तनहा सुरमई बादल दुआओं सा आँचल से
लिपट जाता है
कभी सितारों जड़ी मखमली रात के गालों
पर नज़र का टीका लगा
जाता है
झिलमिल चांदनी का एक प्यारा सा कतरा
संदली हवाओं के झोंकों संग तुम्हारी याद
दिलाता है
बरसती बारिश की रिमझिम बूंदों में लिपटा
तुम्हारा भीगा भीगा रेशमी अहसास
सुर्ख़ गुलाबों में महक बन बिखर जाता है
ये दिल कभी चांदनी की
झील में बहते नूर के सैलाब में तुम्हें तलाशता है
कभी लहराते नीले सागर में पिघलती सिंदूरी सांझ
की अबीरी लाली में
तुम्हारा अक्स तलाशता है
जब भी बांसुरी की मीठी
सी धुन फ़िज़ाओं में गूंजती है
सितारों से बरसती मन्नतों
सा तुम्हारा खूबसूरत ख़्वाब मेरी पलकों की
देहलीज़ पर ठहर जाता है

  • रंजना फतेपुरकर, इन्दौर

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आहिस्ता-आहिस्ता

Fri May 27 , 2022
मैंने बदल दी है अपनी मंज़िल की अब राह आहिस्ता-आहिस्ता बस एक उम्मीद जिंदा मिले फैलाकर बाह आहिस्ता-आहिस्ता ज़रूरी नहीं कि पूरा हो हर एक ख़्वाब मेरा खुली आँखों से देखा बस किसी शायर भी मिले हाथ खोलकर वाह आहिस्ता-आहिस्ता चलते चलते थक गए है कदम मिरे अब किससे क्या […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।