चराग- ए – मुहब्बत

0 0
Read Time1 Minute, 19 Second

जुगनुओं की तरह, टिमटिमाते रहो।
तिरगी ज़िन्दगी से, मिटाते रहो।।

ज़ख्म भी हैं बहुत, दर्द भी कम नहीं।
अश्क पीते रहो, मुस्कुराते रहो।।

मयकशों से तमन्ना , करे मयकदा।
तिश्नगी हर दिलों की, बुझाते रहो।।

ग़म की रातें, अंधेरों के साये घने।
इक चरागे मुहब्बत, जलाते रहो।।

इसमे शोले भी हैं, और नफ़रत भी है ।
इस सियासत से, दामन बचाते रहो।

हिंसा और झूठ, नफ़रत, कपट, दुश्मनी।
इन सभी को हवन मे , जलाते रहो।।

पीढ़ियां आ रही हैं,उभर कर नई।
राह नेकी की उनको दिखाते रहो।।

हर सितम गर”अकेला”, यही चाहता।
अपने जज्बात दिल मे, दबाते रहो।।

आनंद कुमार जैन,

कटनी

परिचय-

नाम आनन्द कुमार जैन
साहित्यिक उपनाम “अकेला”
पता कटनी ( मध्य प्रदेश)
कार्य क्षेत्र व्यापार
विधा ग़ज़ल/मुक्तक/हायकु जैन धर्म पर भी रचना।

सम्मान ग़ज़ल कुम्भ, जैन गौरव सम्मान, राष्ट्र भाषा सम्मान, स्वतंत्रता दिवस राज भाषा सम्मान सहित अनेक हैं।

matruadmin

Next Post

लॉकर

Mon Mar 16 , 2020
मिर्जा का शरीर बढ़े रक्तचाप के लपेटे में आ गया था| डॉक्टर ने दवाई के साथ कुछ परहेज भी बांधे थे| मिर्जा का मन परहेज का आदी न था| उठते बैठते मुये डॉक्टर को सौ-सौ लानते भेजते| “रोटी में थोड़ा घी तो चुपड़ दिया करो| सूखी रोटी हलक से नीचे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।