साहित्य संगम संस्थान द्वारा क्षेत्रीय बोलियों पर आधारित काव्यपाठ सम्पन्न

0 0
Read Time5 Minute, 19 Second

“हम सुमन है इस जहां के आप को करते प्रणाम”

बोली विकास मंच साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा दिनांक 06 जून 2021 को आयोजित बहुत ही शानदार तरीके से बोली संवर्धन आनलाईन वीडियो कवि सम्मेलन आयोजित किया गया कार्यक्रम शुभारंभ मां सरस्वती वीणावादिनी की वंदना कर पुष्प अर्पित कर किया गया जिसमे डॉ ओमप्रकाश मधुब्रत मुख्य अतिथि (जौनपुर उत्तर प्रदेश),डॉ कुमुद श्रीवास्तव कुमुदिनी कार्यक्रम अध्यक्ष (लखनऊ उत्तर प्रदेश), कुमार रोहित रोज विशिष्ट अतिथि(दिल्ली),राजवीर सिंह मंत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष समापन आशिर्वचन की उपस्थिति में किया गया,डॉ विनोद वर्मा दुर्गेश हरियाणा द्वारा संदर्भित विभिन्न पंक्तियों के माध्यम कार्यक्रम संचालन किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में उन्नति शर्मा तिनसुकिया (असम ) द्वारा दुर्गा माता रानी के स्तोत्रम् के साथ किया गया,कार्यक्रम में उपस्थित महानुभावों को कशिश अग्रवाल तिनसुकिया (असम ) स्वागत गीत “हम सुमन है इस जहां के आप को करते प्रणाम” के साथ किया गया,इस कार्यक्रम में उपस्थित कवि/कवित्रियों मे जय हिन्द सिंह हिन्द आजमगढ़ उत्तर प्रदेश ,महेन्द्र कुमार मध्देशिया सिद्धार्थ नगर,उत्तर प्रदेश
रोशन कुमार झा मधुबनी, कोलकाता,छाया सक्सेना प्रभु जबलपुर मध्यप्रदेश,लता खरे सगुण बिलासपुर छत्तीसगढ़,अर्चना तिवारी भुवनेश्वर, ओड़िशा,संगीता अग्रवाल जी नेहरू नगर आगरा की शानदार उपस्थिति में क्षेत्रीय बोली संवर्धन पर बढ़िया प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने अपनें वक्तव्य में कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों, कवित्रियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं बोली विकास मंच के इस कार्यक्रम पर मुझे मुख्य अतिथि के रुप उपस्थित होने पर खुद गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं साथ ही साहित्य संगम संस्थान द्वारा तरह तरह की बोलियो को लेकर कार्यक्रम करवाना और वरिष्ठ से लेकर नवोदित कवियों को अवसर प्रदान करना एक शानदार पहल है पुनः सबको बधाई शुभकामनाए।
“बोली एक अमोल है,जो कोई बोले जान।
लिए तराजू तौलिया,तब मुख बाहर आन।।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं लखनऊ उत्तर प्रदेश से डॉ कुमुद श्रीवास्तव ने बोली विकास के इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वर्तमान परिस्थितियों व पर्यावरण सुरक्षित के लिए संदेश ज्ञापित की, नवीन कुमार भट्ट नीर संयोजक होने के नाते क्षेत्रीय बोली के संवर्धन में नित नई बहारें ला रहीं हैं,देश के विभिन्न प्रांतों के वरिष्ठ अतिथियों,कवि कवित्रियों का अपार सहयोग प्रेम भाव मिल रहा है कार्यक्रम में आप सबकी सहभागिता से ही बहारें आ रही है, भिन्न भिन्न बोलियो को एक मंच पर लाना कार्यक्रम के पूर्व विज्ञप्ति के माध्यम से चयन कर रूपरेखा तैयार करना आदि आदि आज के कार्यक्रम में उपस्थित महानुभावों ,कवि कवित्रियों को सादर वंदन करता हूं ,कार्यक्रम में उपस्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष मंत्रोच्चार के साथ बोली विकास मंच के उपस्थित मनीषियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इसे क्षेत्रीय बोलियो को आगे बढ़ाने के लिए सब आगे आयें ,क्षेत्रीय बोली के कार्यक्रम का उत्साह वर्धन कर कार्यक्रम की समापन की घोषणा की इस कार्यक्रम में इंदू शर्मा शचि,लवकुश तिवारी,रामबाबू,सोनी गौतम,प्रकाश जांगिड़,दीप्ति गुप्ता, रीता तिवारी, डॉ अर्चना वर्मा,प्रेमलता उपाध्याय, मिथलेश सिंह मिलिंदश्रीकांत तैलंग,सुषमा खरे, वंदना नामदेव,अनिल धवन,प्रकाश गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।

matruadmin

Next Post

पुरुषार्थ

Tue Jun 8 , 2021
जिंदगी केवल वही सफल है जिसमे पुरुषार्थ का फल है भाग्य नही, पुरुषार्थ बड़ा है तभी भाग्य से आगे खड़ा है पुरुषार्थ कहलाती ईश्वरीय सेवा इसी से मिलती जीवन मे मेवा इसी से सब अपने बन जाते सहज सबके प्रिय बन जाते जीवन मे भी खुशिया आती परमात्म की कृपा […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।