मुस्कारा के दीजिये

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विवेकानंद जी के शब्दो को
हमने हृदय में समा रखा है।
जो मेरे जीवन में
बहुत काम आ रहा है।
कितना कुछ कहा उन्होंने
मानव जीवन के ऊपर।
करे अगर उनका चिंतन तो
जिंदगी फूलों की तरह खिल जायेगी।।

अगर नहीं है कुछ भी
किसीको कुछ देने को।
तो बस मुस्कारा दीजिये
उसे ही सुकून मिल जायेगा।
और इस उपहार के लिये
वो दुआ तुम्हें दिलसे देगा।
जो जीवन के पथ पर
काम तुम्हारे बहुत आयेगी।।

गरीब लाचार समझ कर
पैसे देने वाले बहुत होते है।
परन्तु जख्मों पर मरहम
लगाने वाले कम होते है।
पैसों से कुछ भी ले सकते हो
पर दर्द किसी का नहीं।
कहे गये मुँह से मीठे शब्द
उसके दर्द को मिटा देगा।।

जिंदगी के सफर में
साथ अपनो का चाहिए।
मुश्किलें जब भी आये
तब हौसले बढ़ाने वाले चाहिए।
अपने बनकर काटने वाले
इस संसार में बहुत है।
गैर होकर भी साथ निभाए
ऐसे लोग कम ही होती हैं।।

ज्योत अगर मानवता की
युवाओं के दिलों में जलाना है।
तो ज्ञान बाँटकर ज्ञान बढ़ाए
न कि सीमित उसे रखे।
जो तुम ऐसा कर पाओगे
तो सच्चे गुरु कहलाओगें।
मान पाओगें सम्मान पाओगें
और दिलो में बस जाओगे।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।