मुस्कारा के दीजिये

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विवेकानंद जी के शब्दो को
हमने हृदय में समा रखा है।
जो मेरे जीवन में
बहुत काम आ रहा है।
कितना कुछ कहा उन्होंने
मानव जीवन के ऊपर।
करे अगर उनका चिंतन तो
जिंदगी फूलों की तरह खिल जायेगी।।

अगर नहीं है कुछ भी
किसीको कुछ देने को।
तो बस मुस्कारा दीजिये
उसे ही सुकून मिल जायेगा।
और इस उपहार के लिये
वो दुआ तुम्हें दिलसे देगा।
जो जीवन के पथ पर
काम तुम्हारे बहुत आयेगी।।

गरीब लाचार समझ कर
पैसे देने वाले बहुत होते है।
परन्तु जख्मों पर मरहम
लगाने वाले कम होते है।
पैसों से कुछ भी ले सकते हो
पर दर्द किसी का नहीं।
कहे गये मुँह से मीठे शब्द
उसके दर्द को मिटा देगा।।

जिंदगी के सफर में
साथ अपनो का चाहिए।
मुश्किलें जब भी आये
तब हौसले बढ़ाने वाले चाहिए।
अपने बनकर काटने वाले
इस संसार में बहुत है।
गैर होकर भी साथ निभाए
ऐसे लोग कम ही होती हैं।।

ज्योत अगर मानवता की
युवाओं के दिलों में जलाना है।
तो ज्ञान बाँटकर ज्ञान बढ़ाए
न कि सीमित उसे रखे।
जो तुम ऐसा कर पाओगे
तो सच्चे गुरु कहलाओगें।
मान पाओगें सम्मान पाओगें
और दिलो में बस जाओगे।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।