वीर शिवाजी

1
Read Time8Seconds

 

 

deelip sharma

(शिवाजी जयंती-१९ फरवरी विशेष)

भारतवर्ष की गौरव-गाथा,अमर मराठा शक्ति अपार।                                                                                                                                                                                                                      भाषा-संस्कृति के रक्षक,जन-जन करता जय-जयकार॥

पिता शाहजी वीर अनोखे,दृढ़ माता जीजाबाई।

वंश-बेल में नव पुष्प खिला,हर्ष हवा लहराई॥

शिवा-जन्म का गौरव स्थल,दिव्य दुर्ग शिवनेरी।

गुरु रामदास की कृपा से,पाई ख्याति घनेरी॥

यत्र-तत्र बिखरा पड़ा,घायल हिन्दुत्व का मान।

संयोजित शोभित करूं,मन में लिया यह ठान॥

वीर-चरण बढ़ते रहे,लिए किले बहु जीत।

सबको संग लेकर चले,मन से जीती प्रीत॥

छापामारी रण-कौशल से,थे मुगल हुए बेहाल।

राजकोष बढ़ता रहा नित,जनता थी खुशहाल॥

शौर्य,पराक्रम,दुष्ट दलन,हुंकार भरी रण मांहि।

देशप्रेम मन में बसा,मात-पिता को शीश नवाहिं॥

देश हमारा उन्नत सुन्दर,’वीर शिवाजी’ शोभाशाली।

नवांकुर युवा जब जागें,गुरू भारत हो गौरवशाली॥

#दिलीप कुमार शर्मा

परिचय : दिलीप कुमार शर्मा का उपनाम ‘विद्यानंदन’ हैl जन्म तिथि-१५अगस्त १९७५और जन्मस्थान उदयपुर वाटी(जिला-झुंझुनू,राजस्थान)हैl आप वर्तमान में केन्द्रीय विद्यालय(जिला-पटियाला)पंजाब में रहते हैंl एम.ए.(हिन्दी),एम.एड. सहित `स्लेट` एवं `नेट`तक शिक्षित श्री शर्मा का कार्यक्षेत्र-शिक्षा,सेवा एवं लेखन हैl आपकी लेखन विधा-कविता,कहानी व आलेखहैl विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है। सम्मान में आपके खाते में प्रतिभा सम्मान,राज्य स्तरीय लेखन पुरस्कार आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य- संवेदनात्मक व मूल्यपरक जीवन का विकास और हिंदी को सम्मान देना है।

0 0

matruadmin

One thought on “वीर शिवाजी

  1. अति सुन्दर शब्दों से गुरुवर कविता है रच डाली।
    जैसे सुन्दर फूलों से माला रच देता है कोई माली।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

भरोसा

Wed Feb 7 , 2018
वक़्त की हथेली से कहाँ कुछ छुप पाया है…, कह रही है हाथ की रेखा सब-कुछ एक माया है…l दुनिया की इस भीड़ में कहाँ निकल आए हम…, अपनों को पराया करके ढूंढते हैं साए हम…l माँ कहा करती थी बेटा मेरा खरा सोना है…, क्या भरोसे की बात करुं,उसे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।