ए पी जे अब्दुल कलाम

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किसे पता था ये समान जीवन जीने वाला एक आम इंसान।
कितना कुछ करके दिखायेगा,
इस मुल्ल्क में ये इंसान।
जिसकी गौरव गाथाये, अब ग रहा है, पूरा हिन्दुस्तान।
उन का नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

कभी भी नहीं किया, उन्होंने जात पात का बखान।
हर पल रखा याद सदा, उन्होंने इंसानियत वाला धर्म।
तभी तो उन्हें याद कर रहे, हर मजहब के लोग।
पहले विज्ञानिक, फिर मिसाइलमैन, से जाने गए।
फिर बने वो हिन्दुस्तान की आन वान और शान।
उन का नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

उनके त्याग और तपश्या के लिए मिला।
उन्हें देश का सर्वोच्य भारत रत्न का सम्मान।
श्रध्दा विनय और भावपूर्व करते है, उन्हें हम आज सलाम।
उन का नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

कितनी प्रतिभाओ के धनी थे,
फिर भी नहीं था उन्हें अभिमान।
“सदा जीवन उच्च विचार” यही थी सबसे बड़ी उनकी एक पहचान।
इसलिए तो कर दिया पूरा जीवन हिन्दुस्तान पर कुर्वान।
उन का नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

अटल जी का था सपना, बने राष्ट्रपति अब्दुल कलाम अपना।
सच करके भी दिखा दिया,
जो सपना उन्होंने देखा था।
इसलिए तो अटल जी कहे जाते है,
आम जनता के नेता।
सब को साथ चलने की अजीब ही शैली वो रखते है।
जिसके बल पर ही उन्होंने,
कलाम को देश का राष्ट्रपति बना दिया।
और भारत का नाम पूरे विश्व में,
चाँद की तरह चमका दिया।
अब आम जनता का राष्ट्रपति उन्हे कहा जाता था,
क्योकि आम जनता के नेता ने उन्हें राष्ट्रपति बनवा दिया।
उन का नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

हर एक देशवासी के प्रति उनके दिल में था,
अटूट प्यार और सम्मान।
दिन में खुली आँखों से युवाओ में सपने वो जागते थे।
फिर पूरा करने के अनेको गुण उन्हें वो सीखते थे।
तभी तो बच्चो और युवाओ के बन गए वो सारथी,
ऐसी इंसान थे अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।।

श्री कलाम जी के जाने से हुआ हैं देश अब वीरान,
शतब्दियो में जन्मते है ऐसा अनोखा इंसान……
जिसका नाम है अब्दुल कलाम, अब्दुल कलाम।
सलाम उन्हें हम करते है, अब याद दिलो में सदा बनी रहेगी उनकी।
की थे हम सब के अपने अब्दुल कलाम ,
अब्दुल कलाम।।

आ. कलाम साहब को श्रद्धांजलि मेरे कविता के माध्यम से।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन (मुंबई )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।