हे मातृभूमि

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हे मातृभूमि ! भारत माता,
तुमको शत शत करें नमन।
प्रेम से हम सब शीश झुकाएं,
श्रृद्धा सुमन करें अर्पण।

तुम पर न्योछावर माता मेरी,
ये तन मन , सारा जीवन।
हरा भरा है आंचल तेरा मां ,
जिसको लहराए मस्त पवन।

सागर तेरे मां चरण पखारें,
है मुकुट हिमालय तेरा मां।
गंगा यमुना सी पावन नदियां,
करे शीतल तेरा तन मन मां।

हीरे मोती से अनमोल रतन,
सब तुझमें ही हैं समाएं मां।
देख सुनहरी काया तेरी ,
तेरे शत्रु सदा ललचाए मां।

रक्तपुष्प माला पहनाकर,
तुझे चंदन तिलक लगाऊं मां।
मां तेरी की रक्षा की खातिर ,
मैं अपना शीश कटाऊं मां।

आजाद, भगत, बिस्मिल जैसे,
सपूतों की तू जननी मां।
हमें गुमान है माता तुम पर,
बस इतना तुम जान लो मां।

जिह्वा पर हो गीत तुम्हारे,
नित तेरा ही गुणगान करें।
मातृभूमि जगजननी मेरी ,
मां तुम हम अभिमान करें।

धर्म भूमि मेरी हो मां तुम,
तुम कर्मभूमि हो मेरी मां।
जन्मभूमि मेरी हो मां तुम,
तुम मातृभूमि मेरी हो मां।

स्वरचित
सपना (स अ०)
जनपद – औरैया
उत्तर प्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।