करवाचौथ

Read Time0Seconds

करवाचौथ केवल, एक दिन का त्योहार नहीं,,
प्रेम की पावनता है ये, रिश्तो का कारोबार नहीं,,
बरसों से इन रीतियों का, अनुसरण हुआ है,,
सात फेरों की प्रीतियों का, पावन प्रण हुआ है,,
इन पावन क्षणों का कभी, होता झूठा आधार नहीं,,
करवाचौथ केवल, एक दिन का त्योहार नहीं,,
प्रेम की पावनता है ये, रिश्तों का कारोबार नहीं,,
अलग नहीं होते पति पत्नी, एक दूजे में रहते हैं,,
ये केवल “राणा” नहीं कहता, वेद हमारे कहते हैं,,
लेकिन सजना सवंरना ही, प्रेम का व्यवहार नहीं,,
करवाचौथ केवल, एक दिन का त्योहार नहीं,,
प्रेम की पावनता है ये, रिश्तों का कारोबार नहीं,,
साजन ख़ातिर देखो, सजनी केसे भूखी रहती है,,
प्रेम में सजी धजी देखो, योवन की नदियां बहती है,,
जिसमें चूड़ी, कंगन,बिंदिया,से बढ़कर श्रृंगार नहीं,,
करवाचौथ केवल, एक दिन का त्योहार नहीं,,
प्रेम की पावनता है ये, रिश्तों का कारोबार नहीं,,
पति की लंबी आयु का,पत्नी ये व्रत करती है,,
अपनी मांग सिंदूरी को, वचनों से नित भरती है,,
ये ऐसा सोदा जिसमें धोखे का व्यापार नहीं,,
करवाचौथ केवल, एक दिन का त्योहार नहीं,,
प्रेम की पावनता है ये, रिश्तों का कारोबार नहीं,,
सचिन राणा “हीरो”
हरिद्वार (उत्तराखंड)

1 0

matruadmin

Next Post

करवाचौथ

Wed Nov 4 , 2020
सुहागन के सुहाग की रक्षा का महापर्व सुहागन के उपवास पर हर सुहाग करता गर्व भारतीय संस्कृति का यह अनूठा त्यौहार है एक दूसरे के प्रति बढ़ता इससे सद्व्यवहार है करवा चौथ के पर्व पर करो एक संकल्प क्रोध जीवन मे न रहे शांत स्वभाव विकल्प।#श्रीगोपाल नारसन Post Views: 79

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।