मोहब्बत हो गई

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खुद एक चांद हो तो
क्यों पूर्णिमा इंतजार करे।
और मोहब्बत का इसी रात में
होकर मदहोश हम आंनद ले।।

तुम जैसे दोस्त से
यदि मोहब्बत हो जाये।
तो हमें सीधी सीधी
जन्नत मिल जाये।।

डूब चुका था
प्यार के सागर में,
और नश नश में
मोहब्बत भर गया था।
क्यों बहार निकाला
मुझे इस सागर से..?
इस प्रश्न का उत्तर
अब तुमको ही देना है।।

गुजारिश है तुमसे आज
दिलमें थोड़ी सी जगह दे दो।
और अपनी गर्म सांसो से
मुझे फिरसे जीवन दे दो।।

आज दिलको मत रोकना
हजूर दिलसे मिलने को।
क्योंकि ये पहले ही व्याकुल था
तुम्हारे दिलमें डूबने को।।

इतने सुंदर हो तुम की
देखकर दर्पण भी शर्मा रहा है।
मेरा दिल भी तो आईना है
जो परछाई मुझे दिखा रहा।।

इसलिए मेरा दिल आज
तुम्हारे दिलमें शामाया है।
जो धड़कनों को मेरी
मोहब्बत करने को बुला रहा।।

कितनी हसीन रात है
जो हमको बुला रही है।
क्योंकि दो दो चांद जो
एक साथ आज निकले है।।

तुम्हारे हर शब्दो को अब तक
मैंने दिलमें सजाकर रखे है।
तभी तो मोहब्बत के चिराग
अभी भी जल रहे है।।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन (मुम्बई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।