जमीर मार बैठे हैं

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मत जात पात की आग में झोंको मेरे देश को
नेताजी पहनके खादी मत लजाओ बापू के भेष को

तुम भूल गये कितनी दीं कुर्बानियां आजादी की खातिर
माँ भारती के लिए हंसते-हंसते कट गये हजारों हजार सिर

आज हम आजादी का इतिहास भुला बैठे हैं
कुर्सी, पद, पैसा की खातिर जमीर मार बैठे हैं

कोई धर्म – मजहब नहीं बुरा, सब अच्छे हैं
बस इंसान ही इंसानियत से कच्चे हैं

राजनैतिक मंचों से जहर उगला जाता है
फिर जनता को आपस में लड़ाया जाता है

वोट बैंक की खातिर झूँठ पर झूँठ परोसा जाता है
बार-बार हर बार वोटर को ही ठगा जाता है

राजनीति चमकाने को और कुर्सी बचाने को
बलात्कार के केस दबाये जाते हैं, इज्जत बचाने को

धर्म, मजहब, जात पात से ऊपर है देश
संसद में घुस गये शैतान बनाकर साधु भेष

दुर्भाग्य देश का एक लुटेरा जाता है और दूसरा आता है
फिर नित लूट-लूटकर भारत को कंगाल बनाया जाता है

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
फतेहाबाद, आगरा

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।