जीवन

Read Time0Seconds

पति पत्नी जीवन के दो पहिए
जहां तक हो साथ ही चलिए
भले आएं कितने ही झंझावात
विश्वास पर न हो कोई आघात
चले पल प्रति पल साथ सदा
समर्पण भाव में व्याप्त सदा
न कोई छोटा न कोई बड़ा
जीवन में रहते बराबर सदा
खुशियों भरा रहे यह जीवन
घर एक मन्दिर सर्व समर्पण।
परमात्मा याद में बीते जीवन
पवित्रता भरा हो जीवन उपवन।
#श्रीगोपाल नारसन

0 0

matruadmin

Next Post

लिखो यारों

Fri Oct 9 , 2020
शह कभी मात पर लिखो यारों मुद्दे की बात पर लिखो यारों कैसे कटते हैं गरीबों के दिन कैसे कटती,रात पर लिखो यारों तूफान कहीं , कहीं पर सूखा है कुछ तो बरसात पर लिखो यारों चोर उचक्कों का क्यों जमघट हैं बदले ख़यालात पर लिखो यारों रोटी के टुकड़ों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।