जीवन

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पति पत्नी जीवन के दो पहिए
जहां तक हो साथ ही चलिए
भले आएं कितने ही झंझावात
विश्वास पर न हो कोई आघात
चले पल प्रति पल साथ सदा
समर्पण भाव में व्याप्त सदा
न कोई छोटा न कोई बड़ा
जीवन में रहते बराबर सदा
खुशियों भरा रहे यह जीवन
घर एक मन्दिर सर्व समर्पण।
परमात्मा याद में बीते जीवन
पवित्रता भरा हो जीवन उपवन।
#श्रीगोपाल नारसन

matruadmin

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लिखो यारों

Fri Oct 9 , 2020
शह कभी मात पर लिखो यारों मुद्दे की बात पर लिखो यारों कैसे कटते हैं गरीबों के दिन कैसे कटती,रात पर लिखो यारों तूफान कहीं , कहीं पर सूखा है कुछ तो बरसात पर लिखो यारों चोर उचक्कों का क्यों जमघट हैं बदले ख़यालात पर लिखो यारों रोटी के टुकड़ों […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।