सामयिक परिवेश इकाई गुजरात मंच पर आजादी उत्सव में देश के सभी प्रदेश से रंग रेलाया गया

Read Time0Seconds

आजादी के उत्सव में सामयिक परिवेश इकाई गुजरात मंच पर देश के प्रसिद्ध साहित्यकार जुड़े और आजादी के उत्सव में अपनी रचना ओ के माध्यम से सुंदर रंग बिखरते भारत माता की प्रतिमा विविध प्रकार के रंगों से बहुत ही निखर उठी,
इस कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 16 अगस्त 2020 दोपहर मे तीन बजे श्री श्याम भारती झारखंड ने किया गया था जिस मे गांधी नगर के साहित्य सेवा संस्थान सभा अध्यक्ष के रूप में निमंत्रित थे,उनका सम्मान सामयिक परिवेश की संपादक ममता मोहतरमा ने किया था,
इस कार्यक्रम सरस्वती वंदना खुशबु कुमारी द्वारा होने के बाद शुरू किया गया था, कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ गुलाब चंद पटेल सभा अध्यक्ष द्वारा किया गया था,
इस सामयिक परिवेश हिंदी मे दिल्ली से प्रकाशित हो रहा है किन्तु अब देश की अन्य भाषाओं को भी इसमे स्थान दिया जाएगा
इस कार्यक्रम में कुल 19 कवि जुड़े हुए थे, जिसमें गुजरात और देश के विभिन्न प्रदेश से कवि ओ ने हिस्सा लिया था, इस संस्था सामयिक परिवेश इकाई गुजरात मंच पर आजादी उत्सव कार्यक्रम सौ प्रथम था, श्याम भारती जी ने अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर का और सभी कवि प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया था
अंत में सभा अध्यक्ष श्री डॉ गुलाब चंद पटेल कवि लेखक अनुवादक के द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी कवि ओको अभिनंदन दिया और वंदे मातरम राष्ट्र गान प्रस्तुत करके कार्यक्रम का समापन किया गया

डॉ गुलाब चंद पटेल
अध्यक्ष
सामयिक परिवेश इकाई गुजरात

0 0

matruadmin

Next Post

श्री राम चालीसा

Mon Aug 17 , 2020
रघुकुल वंश शिरोमणी, मनुज राम अवतार। मर्यादा पुरुषोत्तमा,कहत है कवि विचार।। जै जै जै प्रभु जय श्रीरामा। हनुमत सेवक सीता वामा।।1 लछमन भरत शत्रुघन भ्राता। मां कौशल्या दशरथ ताता।2 चैत शुक्ल नवमी सुखदाई। दिवस मध्य जन्में रघुराई।।3 नगर अवध में बजी बधाई। नर नारी गावे हरषाई।।4 दशरथ कौशल्या के प्राणा। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।