रामायण पहेली चालीसा की लोकप्रियता बढ़ी।

0 0
Read Time1 Minute, 6 Second

एक ओर जहां अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई हैं वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन में बनाया गया डॉं दशरथ मसानिया द्वारा रामायण पहेली चालीसा बच्चों में बहुत लोकप्रिय हो रहा है ।
उल्लेखनीय है इस चालीसा में 40 चौपाइयों के माध्यम से 40 पहेलियां तैयार की गई हैं जो पूर्णतया भगवान राम के आदर्श पर स्थापित है । एक ओर जहां इन चौपाइयों के गायन से बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर नैतिकता और भारतीय संस्कृति का भी खेल खेल में अध्ययन हो रहा है।शिक्षण के साथ मनोरंजन की इस पहल का शिक्षा जगत ने स्वागत किया है।
रामायण की पहेलियां बच्चों के लिए उत्सुकता भी पैदा कर रही हैं। परिवार में पौराणिक लोक कथाओं का आकर्षण बड़ा है।
दशरथ मसानिया

matruadmin

Next Post

मेरा देश

Fri Aug 7 , 2020
हरा , भरा है मेरा देश , सुखद, मनोरम प्यारा देश धरा यहाँ की बहुत पवित्र, सब धर्मावलम्बी मेरे मित्र।। एक समान हैं सारे धर्म, हम सब करते अच्छे कर्म। होली, ईद, दशहरा दीवाली मिलजुल कर आती खुशहाली याद है बचपन और स्कूल , वो गलियाँ और उड़ती धूल जिन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।