पायलट V/S गहलौत

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गहलौत ने ऐसा चक्कर चलाया,
पायलट चारो खाने चित्त आया।
कहता था मै सरकार गिरा दूंगा,
पर ऐसा गिरा खुद उठ ना पाया।।

अब पायलट कैसे हवा में उड़ेगा,
उसका जहाज कहां लैंड करेगा।
मन में मन वह पछता रहा होगा,
अपनी करनी वह खुद ही भरेगा।।

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का,
रहा वह अब सोलह दूनी आठ का
बनना चला चोबे से छक्के बनने,
रहा न धोबी वह अपने घाट का ।।

चला था वह नाको चने चबाने को,
रहा न एक चना उसे चबाने को।
खुश होगा वह बहुत आजकल,
अगर मिले एक चना चबाने को।।

कहते हैं नशा होता है शराब में,
पर शराब से ज्यादा है सत्ता में,।
जब दोनों न मिले किसी नेता को,
वह डूब जाता है गमो के छत्ते में।।

माया न मिली,न मिले उसे राम,
मांगते हो गई सुबह से अब शाम।
क्या करेगा वह बेचारा पायलट,
जब कोई न रहा उसका हाथ थाम

सोचा था सत्ता जहाज उड़ाने की,
किसी ने सोचा था उसे गिराने की।
दोनों ही लगे रहे उड़ाने गिराने मै,
दोनों लालायित हैं सत्ता पाने की।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।