यादें जीवन की

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इतनी-सी क्या देर हो गई तुझे ,
तुम्हें आए कितना दिन हुआ ,
ऐसे कोई थोड़े जाता है भला क्या ,
ये जिंदगी कोई खेल थोड़े है ,

चौतीस यैवन देख चुके तुम ,
क्या इतना ही ज्यादा हो गई ,
इस छोटी-सी जिंदगी मे ,
जीवन क्यों मजबूर हूई ,

अभी सारा जीवन बाकी था ,
शुरुआत तो अब हुई थी ,
दूसरे की हौसला देने वाले ,
स्वयं क्यूँ तू हार गए तुम ,

इस नश्वर दुनिया मे तुम ,
मौत को क्यूँ दोस्त बना लिए तुम ,
अभी और अधियारा आता भी ,
इतनें मे क्यूँ हार गए तुम ,

जीने का सलीका सिखाने वाले ,
स्वयं सलीका भुल गए तुम ,
युवा जीवन के पायदान पे चढ़ते ,
दुनिया से क्यूँ रूठ गए तुम ,

सबके चेहरे पे हँसी लाने वाले ,
स्वयं डिप्रेशन मे चले गए तुम ,
इस बेखुदी दुनिया मे ,
जीवन से हार गए तुम !
रुपेश कुमार
सीवान (बिहार)
पिता – श्री भीष्म प्रसाद
माता – बिंदा देवी
शिक्षा – स्नाकोतर भौतिकी,बी.एड(फिजिकल सांइस),ए.डी.सी.ए(कम्प्यूटर),इसाई धर्म(डिप्लोमा)
वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !
प्रकाशित पुस्तक ~
“मेरी कलम रो रही है”(एकल संग्रह ईबुक-2018)
आठ साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे !
विभिन्न राष्ट्रिय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित,लेख !
राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त यथा ~
“भारती ज्योति”(राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, प्रयागराज-2010)
“साहित्य अभ्युदय सम्मान”(साहित्य संगम संस्थान, इंदौर-2018)
“फणीश्वरनाथ रेणू आंचलिक साहित्य सम्मान”(राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान, हरियाणा-2018)
“साहित्य साधक सम्मान”(ऑल इंडिया हिंदी उर्दू एकता ट्रस्ट(रजिं),गाजियाबाद-2020),
“जनचेतना अक्षर सम्मान”(विश्व जनचेतना ट्रस्ट भारत, बीसलपुर-2020),
“लीटरेरी कॉर्नल”(स्टोरी मिरर इंडिया, मुंबई-2020)
“केसरी सिंह बारहठ सम्मान-2019″(राजल वेलफेयर एंड डवलपमेंट संस्थान, जोधपुर)
“भारती भूषण”(राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, प्रयागराज-2014)
“काव्य सरस्वती”(अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद, कप्तानगंज-2010)
“साहित्य शिल्पी सम्मान” (साहित्य द्वार संस्था, बस्ती-2020)
“सहयोग साहित्य सम्मान” (सोनल साहित्यिक समूह, बाड़मेर, राजस्थान- 2020)
“श्रेस्ठ सृजन सम्मान”(राष्ट्रीय कवि चौपाल, राजस्थान-2020),
“बेस्ट हिंदी राईटर ऑफ़ द ईयर” (राजल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट संस्थान, जोधपुर-2020)
“राष्ट्र गौरव कलम सम्मान”(अर्णव कलश एसोसिएशन, हरियाणा-2020)
“श्रीमती फुलवती देवी साहित्य सम्मान”(मीन साहित्य संस्कृति मंच, हरियाणा -2020)
“साहित्य साधक सम्मान”(अखिल भारतीय साहित्यिकी मंच, सहरसा-2020) इत्यादि!
सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।