अवसाद के विरुद्ध जंग में जारी रहे डिजिटल काव्य पाठ

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कवि मोलवा ने बढ़ाया कवियों का हौसला

इंदौर ।

कोरोना संक्रमण काल में जहाँ एक ओर व्यक्ति कोरोना से जूझता रहा और दूसरी ओर घर बैठे-बैठे व्यक्ति अवसादग्रस्त भी होता ही गया, ऐसे काल में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के माध्यम से राष्ट्रीय कवि मुकेश मोलवा के फेसबुक पृष्ठ पर नवोदित और स्थापित कवियों द्वारा नियमित एक घण्टे काव्य पाठ करवा कर लोगों को तनाव से मुक्त करने का महनीय कार्य किया।
संस्थान के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं ओज के प्रसिद्ध कवि मुकेश मोलवा के फेसबुक पृष्ठ पर दस हजार से ज्यादा प्रशंसक जुड़े हैं,उसी पृष्ठ पर एक माह में देश के प्रसिद्ध कवि और कवियित्रियों जिनमें दीपशिखा रावल, हेमन्त बोर्डिया, दीपक पारिख, राज शेखावत, प्रियंका रॉय, नरेंद्रपाल जैन, हास्य कवि सुनील व्यास,आयुषी राखेचा, पल्लवी त्रिपाठी, पुष्पेंद्र पुष्प, अनिल उपहार, हिमांशु भावसार, पंकज प्रसून, कुलदीप रंगीला, शंभुसिंह मनहर, संदीप सांदीपनी, सतीश शाश्वत, सरला शर्मा, नीरज निर्मोही, विपिन वत्सल, गौरव साक्षी, कमलेश शर्मा व प्रदयुम्न शर्मा द्वारा काव्य पाठ किया गया।
पृष्ठ का संयोजन हिमांशु भावसार हिन्द द्वारा किया गया। इन डिजिटल काव्य पाठ को लाखों लोगों द्वारा देखा गया।

संस्थान द्वारा आरम्भ ‘एक युद्ध अवसाद के विरुद्ध’ अभियान में कवि मुकेश मोलवा ने महती भूमिका अदा करके कोरोना संक्रमण काल में लोगों को तनाव मुक्त रखने का कार्य किया।
कवि मोलवा ने बताया कि ‘जब सम्पूर्ण विश्व इस आपदा के शिकार रहा तो ऐसे दौर में कवियों ने अपनी काव्य पंक्तियों के माध्यम से जनजागृति भी पैदा की और लोगों को तनाव मुक्त भी रखा।वे बधाई के पात्र हैं।’
अवसाद के विरुद्ध अभियान के लिए संस्थान के संरक्षक डॉ. वेदप्रताप वैदिक, राजकुमार कुम्भज, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.नीना जोशी, राष्ट्रीय महासचिव कमलेश कमल, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन, भावना शर्मा, देवेंद्र जैन, नितेश गुप्ता, जलज व्यास, लक्ष्मण जाधव, मोनेश जैन, डॉ.वासिफ़ काज़ी, आदि ने बधाइयाँ प्रेषित करके हौसला बढ़ाया।

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।