जरा ठहर जाओ

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कहीं छुट ना जाय,
ज़रा ठहर जाओ,
कहां भाग रहे,किस ओर जाना है?
सृजन तो यहां है, कलियां मुस्कुराती,
कोयल गीत गाती, भौंरा करता गुनगुन,
धूप-छांव सुहलाती, तितली है खेलती।
तो फूल भाव दिखाते, मिलने को दो-दो मन,
आतुर इतराते, सुंगध आम्र बौरों की,
मदरसा भर जाती और ये चिड़िया ची ची करती जाती।
पीला धुला हुआ उजास,मन भर जाता।
प्रेम यहां गुनगुनाता,
कहां जा रहे,
जरा ठहरो,
कहीं फिर छुट ना जाय,आओ बसंत देख ले।

नाम-रेखा पारंगी
साहित्यिक उपनाम रेखा पारंगी

पतास्टेशन जंवाई बांध,जिला पाली राजस्थान।
शिक्षास्नातकोतर , अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान,एवं इतिहास। कार्य क्षेत्रसरकारी शिक्षक।
विधागध एवं पध। प्रकाशनवूमेन एक्सप्रेस समाचार पत्र एवं इंदौर समाचार पत्र में।
उपलब्धि कोई नहीं
लेखन का उद्देश्य_लिखना मेरा शौक है और हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने में सहयोग।

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matruadmin

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।