सृष्टि चक्र

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“अरे बीज आओ तुम्हारा स्वागत है” मिट्टी ने बीज को ममता से भर अपनी कोख में स्थापित कर खुश होते कहा।
“आप कौन हैं और मैं कहाँ आ गया” सहमा सा बीज बोला।
“मैं मिट्टी हूं अब से मैं ही तुम्हारे लिए भोजन, पानी और प्रकाश की व्यवस्था करूंगी और समय आने पर तुम्हें अंकुरित करूंगी” मिट्टी ने बीज को सहलाते हुए कहा।
“वो कैसे” बीज ने और जानना चाहा।

” तुम्हें मुझमें मिलकर/विगलित होकर अंकुरित होना होगा और जब तक तुम मुझसे जुड़े रहोगे तुम्हें मैं पोषण देती रहूंगी।” मिट्टी ने कहा।

“इसका मतलब मुझे ताप-गर्मी सहकर और अपने अस्तित्व को मिटाकर नए रूप में प्रस्फुटित होना होगा और संसार का भरण पोषण करना होगा।” बीज ने कहा।
“हां , यही जीवन है और यही उसका उद्देश्य ,मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूंगी।” मिट्टी ने आश्वस्त करते हुए कहा।

“फिर तो मैं आपके बच्चे जैसा हुआ पर आपसे बिछुड़ कर मेरा क्या होगा।” घबराये बीज ने पूछा।

“सुनो प्यारे बीज ! तुम्हारे जैसे और भी बहुत सारे बीज हैं उनमें से कुछ तो मेरे साथ आकर वापस मिलेंगे और उनका यह क्रम चलता रहेगा, चलता रहेगा…”

“और जो नहीं आते उनका क्या होता है” बीज ने बीच मे ही पूछ लिया।

“वे अपना सर्वस्व इस संसार के लिए न्योछावर कर इस क्रम से मुक्त हो जाते हैं।” मिट्टी ने लम्बी साँस लेते हुए कहा।

द्रष्टा वट वृक्ष जिसके नीचे हल जोतकर थका हारा किसान सुस्ता रहा था, बीज और मिट्टी के इस संवाद को सुन संसार चक्र/सृष्टि की निरंतरता को सहज ही समझ गया।

#डॉ. अनिता जैन “‘विपुला’

 परिचय :1. नाम:  डॉ. अनिता जैन 2. धारक नाम / उपनाम (लेखन हेतु): “विपुला”3. जन्मदिन एवं जन्म 11 जुलाई स्थान:  बीकानेर राजस्थान 4. शैक्षणिक योग्यता (ऐच्छिक):   Ph. D. , M. Phil. NET.M.A. (संस्कृत – साहित्य , दर्शन )M.A. ( हिंदी साहित्य )MBA in HR5. व्यवसाय: अतिथि प्राध्यापक ( विश्वविद्यालय में )                        6. प्रमुख लेखन विधा: छंद मुक्त, मुक्तक, हायकू ,वर्णपिरामिड, क्षणिका, लघुकथा,निबन्ध,   आलेख आदि।        7. साहित्यिक उपलब्धियाँ/पुरस्कार/सम्मान: विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएँ एवं लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आकाशवाणी में एंकरिंग एवं कविता पाठ आदि । ngo से जुड़ी हुई हूँ। समय समय पर सामाजिक उत्थान के कार्यों में सहभागिता।हिंदी के साथ साथ राजस्थानी भाषा में भी लेखन। “वर्णपिरामिड श्री”, “सर्वश्रेष्ठ मुक्तककार”,  सम्मान आदि ।8. रुचि/शौक़: संगीत, अध्ययन,लेखन,प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण,कुकिंग आदि ।9. उदयपुर राजस्थान ।10.  उपलब्धियों में- 12 वीं बोर्ड की योग्यता सूची में 7वाँ स्थान। मेडल एवं मैरिट छत्रवृति प्राप्त, बी. ए. में राष्ट्रीय छत्रवृत्ति प्राप्त।NSS में प्री आर डी एवं राष्ट्रीय एकात्मकता शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व।वाद विवाद , आशु भाषण, निबन्ध एवं कविता आदि में छात्र जीवन में अनेक पुरस्कार प्राप्त। *महाविद्यालय शिक्षिका के रूप में केरियर की शुरुआत। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पत्र वाचन, शोध पत्र प्रकाशन। *दो पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होने वाली हैं।20

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।