हिन्दीग्राम ने किया ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित

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इन्दौर। विश्वभर में फैली महामारी कोरोना के कारण पूरा भारत भी लॉक डाउन के दूसरे चरण में आ गया। ऐसे स्थिति में हिन्दी प्रेमियों के मनोरंजन और सृजन को घर बैठे जारी रखने के उद्देश्य से हिन्दीग्राम द्वारा बुधवार 15 अप्रैल 2020 को ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका संयोजन संस्था की संयोजिका एवं दिल्ली की साहित्यकार भावना शर्मा ने किया।
इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन में दिल्ली के करीब 20 कवि-कवयित्रियों ने भाग लिया जिनमें निकिता शर्मा, विनीता गरकोटी, मनीषा जोशी, राधा गोयल, सुरभि सप्रू, गिरीश चावला, डॉ. भावना शुक्ला, कुसुमलता ‘कुसुम’, मीना, ओमप्रकाश, अंजू खरबंदा, मुक्ता मिश्रा, विजयलक्ष्मी भट्ट शर्मा, विभा त्रिपाठी, अंजलि वैद, मोनिका शर्मा, परिणीता सिन्हा, चंद्रमणि चौधरी, नूतन गर्ग, व इन्दौर की रागिनी स्वर्णकार सम्मिलित हुईं।
इन सभी रचनाकारों ने अपनी काव्य रचनाओं के वीडियो व्हाट्सएप्प समूह में नियत क्रम में प्रेषित किए।
हिन्दी प्रचार के लिए प्रतिबद्धता से कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रेषित किए गए। कवि सम्मेलन को समूह के साथियों द्वारा लॉक डाउन का सदुपयोग बताते हुए सराहा गया एवं सभी श्रोताओं द्वारा कवियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।