रामनवमी पर पूज्य सन्तों व विश्व हिन्दू परिषद का आवाहन

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प्रिय रामभक्तों,

    रामो विग्रहवान धर्मः। रामनवमी का पवित्र त्यौहार आने वाला है। इस शुभ अवसर को भक्तजन मन्दिरों में बड़ी संख्या में इकट्ठे होकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव सामूहिक रूप से मनाते आ रहे हैं।

    इस वर्ष संसार में विशेष आपात स्थिति बन गई है। हमारा प्यारा देश भी उस प्राणघातक कोरोना महामारी से जूझ रहा है। हमें इस महामारी पर उसी प्रकार विजय प्राप्त करनी है जैसे प्रभु श्रीराम ने सभी संकटों पर विजय प्राप्त की। अतः हम सब सरकार के सभी निर्देशों का पालन करते हुए भगवान का जन्मोत्सव पहले से भी अधिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाएंगे।

    हम समस्त रामभक्तों का आवाहन करते हैं कि रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी तदनुसार 02 अप्रैल 2020) को मध्यान्हकाल दिन में 12 बजे अपने-अपने घर में प्रभु श्रीराम के विग्रह अथवा चित्र के सामने परिवार के साथ बैठकर धूमधाम से भजन-पूजन करें, आरती उतारें, तत्पश्चात् एक माला (108 बार) विजय महामंत्र (श्रीराम जय राम जय जय राम) का जाप करें, प्रसाद आदि ग्रहण करें। सायंकाल अपने-अपने घर में एवं घर के दरवाजे पर दीप जलाएं, अपने गाँव, मोहल्ला, बस्ती के मन्दिरों में भी दीप जलाने की तथा यथासंभव रामचरित्र का ध्वनि विस्तारक के माध्यम से प्रसारण की व्यवस्था करें। ऐसा करने की प्रेरणा अपने पड़ोसियों, मित्रों व सम्बंधियों को भी दें। सारा भारत राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाए, यही समाज को हमारा संदेश है। आप सब सुखी रहें, स्वस्थ रहें, भगवान की कृपा आपको प्राप्त हो।

भवदीय

युगपुरुष स्वामी परमानन्द गिरि महंत नृत्यगोपालदास

अखण्ड परमधाम, हरिद्वार मणिरामदास छावनी, अयोध्या

सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र अध्यक्ष-, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र

एडवोकेट आलोक कुमार जस्टिस विष्णु सदाशिव कोकज

कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद अध्यक्ष, -विश्व हिन्दू परिषद

जारी कर्ता :
विनोद बंसल
प्रवक्ता-विहिप

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।