शालेय बाल अभिव्यक्ति पत्रिका -स्वच्छता ही सेवा 

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drushti

‘स्वच्छता ही सेवा ‘ विशेषांक  गोपाल कौशल की कविताओं एवं बच्चों द्धारा रेखांकन व् कविताओं से भरा सुन्दर गुलदस्ता है | जिसमे स्वच्छता के मायने क्या होते है को बेहतर तरीके से बताया है ताकि अन्य भी इस पत्रिका से प्रेरणा लेकर स्वच्छता ही सेवा के भाव में सम्मिलित हो के स्वस्थ्य जीवन और साफ, सुंदर नगर बनने में अपनी सक्रिय भूमि अदा करने में आगे आ सकें | शासकीय नवीन प्रावि (शाला सिद्धि ) नयापुरा माकनी इस तरह की शालेय पत्रिका बाल अभिव्यक्ति को प्रकाशित कर बच्चों को स्वच्छता की दिशा तो देते ही है साथ ही उनका बेहतर मार्गदर्शन देकर उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय रखते है |

गोपाल कौशल की कविता में से एक मुखड़ा तनिक  देखिए –
“स्वच्छ भारत बनाना है
राष्ट्रपिता बापू ने दिया |
मंत्र स्वच्छता ही सेवा ,
हमको अब अपनाना है| |”
 एक संकल्प -हम ऐसा करेंगे  में स्वच्छता के संबंध में विभिन्न उपयोगी बिंदुवार समझाइस दी गई जो की हितकारी है | इसके अलावा स्वच्छता की शपथ के अंतर्गत  दायित्व के लिए प्रतिबद्ध और सब मिलकर घर -आँगन -गाँव को  स्वच्छ बनाने पर भी जोर दिया गया है |नदियों की स्वच्छता के अलावा पर्यावरण, व् वन्यजीव  संरक्षण ,स्कूल चले हम अभियान पर भी विभिन्न काव्य रचनाओं एवं शालेय बच्चों के द्धारा सुन्दर चित्रों के द्धारा स्वच्छता के प्रति जागरूकता का मूल मंत्र दिया है जो प्रेरणादायी है | गोपाल कौशल ने बड़ी अच्छी बात कही – स्वच्छता को हम सेवा ,स्वभाव के रूप में अपनाए तभी हम गांधीजी के स्वच्छ भारत-सुंदर भारत ,स्वच्छ तन -स्वच्छ मन  की कल्पना को सार्थक कर सकते है |
‘सफल बनाए स्कूल चले अभियान
शिक्षा पर हो जनमानस  ध्यान |
हिमालय-सी ऊँचाई पाए हर बच्चा
बढ़ाए अपने  देश जग में मान “
बहुत सुंदर पक्तियों से ध्यान आकर्षित करवाकर स्कूल  चले अभियान को सार्थक किया है | रेखांकन के जरिए “साबुन से हाथ धोने का तरीका भी बताया है | जिससे सही तरीके हाथों को धोना बताया जो की सही भी है |
चंद पक्तियों में अपनी प्रेरणादायी बात कही है | कौशल की यही खासियत और उनके द्धारा हर रोज लिखी जाने वाली कविता के लिए वे क्षेत्र में आकर्षकता का केंद्र बने हुए है और अपनी स्कूल जिसमे वे प्राध्यापक का सफल दायित्व का निर्वहन कर ऊर्जावान की भूमिका निभा रहे है|  उन्हें इस कार्य की हार्दिक बधाई और स्वच्छता ही सेवा के लिए शुभकामनाए  | शालेय पत्रिका बच्चों और बड़ों को अवश्य स्वच्छता बनाए रखने की प्रेरणा प्रदान करेगी |
पत्रिका -शालेय पत्रिका बाल अभिव्यक्ति -स्वच्छता ही सेवा
प्रकाशक – बाल केबिनेट शासकीय नवीन प्रा। वि (शाला सिद्धि ) नयापुरा माकनी ,जन शिक्षा                   केंद्र नागदा जिला धार म प्र
प्रेरणास्त्रोत -गोपाल कौशल (सहायक अध्यापक ,नेशनल मोटिवटर नवोदय क्रांति भारत
 पता – शासकीय नवीन प्रा। वि (शाला सिद्धि ) नयापुरा माकनी ,जन शिक्षा केंद्र नागदा जिला             धार म प्र
समीक्षक – संजय वर्मा ‘दॄष्टि ‘
               मनावर जिला धार

#संजय वर्मा ‘दृष्टि’

परिचय : संजय वर्मा ‘दॄष्टि’ धार जिले के मनावर(म.प्र.) में रहते हैं और जल संसाधन विभाग में कार्यरत हैं।आपका जन्म उज्जैन में 1962 में हुआ है। आपने आईटीआई की शिक्षा उज्जैन से ली है। आपके प्रकाशन विवरण की बात करें तो प्रकाशन देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाओं का प्रकाशन होता है। इनकी प्रकाशित काव्य कृति में ‘दरवाजे पर दस्तक’ के साथ ही ‘खट्टे-मीठे रिश्ते’ उपन्यास है। कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता की है। आपको भारत की ओर से सम्मान-2015 मिला है तो अनेक साहित्यिक संस्थाओं से भी सम्मानित हो चुके हैं। शब्द प्रवाह (उज्जैन), यशधारा (धार), लघुकथा संस्था (जबलपुर) में उप संपादक के रुप में संस्थाओं से सम्बद्धता भी है।आकाशवाणी इंदौर पर काव्य पाठ के साथ ही मनावर में भी काव्य पाठ करते रहे हैं।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।