कौन  समझाए इन्हें

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rakesh dube

चाँदनी  रात  के   दामन   से  सितारा लेकर,

कोई आया है मेरे  घर में उजाला लेकर।

आग  दुनिया  में  लगाने  के  लिए काफ़ी हैं,

अश्क ठहरे हैं जो पलकों का किनारा लेकर।

इश्क़ परवान  चढ़ेगा कि नहीं रब जाने,

हम तो निकले हैं मुहब्बत का इरादा लेकर।

टाल देते हैं हर  इक  बात वो कल पर यारों,

लौट आता  हूँ मुलाक़ात  का  वादा लेकर।

ग़म न बाँटे  हैं ज़माने में  कोई भी दिल के,

मैं  कहाँ  जाऊँ  बता ज़ख़्म  ये ताजा लेकर।

बात हर सिम्त छिड़ी आज यहाँ रोटी की,

लोग बैठे  हैं  ख़यालों   में  निवाला लेकर।

लोग  दीवार उठाने  में   लगे   हैं   सारे,

कौन  समझाए इन्हें नाम ख़ुदा का लेकर।

लोग दीवाना  समझते हैं सभी ‘गुलशन’ को,

जब कभी  हँसता है वो नाम तुम्हारा लेकर।

मैने देखा चौंक,अरे क्या बोली पत्नी।

                                                                 #राकेश दुबे ‘गुलशन’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।