घरौंदा

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सुबह उठते ही मां ने घर में झाड़ू लगाने के लिए झाड़ू हाथ मे ली, तो कटी झाड़ू को देखकर मां झल्ला उठी ।

बच्चो को डांटते हुए मां बोली, ….सच-सच बताना, किसने झाड़ू का यह हाल किया । देखते ही देखते तीनों बच्चे मेघा, भय्यू और किशु लाइन से मां के सामने सिर झुकाए खड़े हो गए। माँ, इस गुस्ताखी के लिए बारी-बारी से तीनो के कान मरोड़ कर पूछ रही थी, मगर मजाल है कि बच्चो की एकजुटता जरा सी भी डिगी हो ।

मुझे ….सब मालूम है, कल तुम तीनों यहाँ रोटा-पानी खेल रहे थे। सच-सच बताओ कि झाड़ू का यह हाल किसने किया ? तभी चारपाई के नीचे से निकली कैंची ने इस बात का प्रमाण दिया कि झाड़ू को इन तीनों बच्चों में से किसी ने काटा है। प्रमाण उपलब्ध हो जाने के बाद मां का स्वर तीखा और सख्ती कड़ी होने लगी । तभी, माँ ने बच्चो को लालच देकर प्रलोभित भी करना चाहा, यदि तुम अपना गुनाह कबूल कर लो तो आज टॉफी भी मिलेगी और उपहार भी ।

सजा और प्रलोभन की मिश्रित जंग में बच्चो ने प्रलोभन स्वीकार किया और तीनों बच्चो ने एक स्वर में गुनाह मंजूर करते हुए हाथ खड़े किये।

अच्छा ! तो यह शरारत तुम तीनों ने मिल कर की है ? …. मां ने सहज भाव से पूछा कि यह बताओ कि झाड़ू आखिर तुमने क्यों काटी? और तुम्हे मालूम है कि, घर को साफ रखने के लिए झाड़ू की बड़ी भूमिका होती है ? तभी किशू ने आगे बढ़कर कहा !…माँ, कल जब हम रोटा पानी खेल रहे थे तभी दो चिड़िया बारी-बारी से झाड़ू का तिनका तोड़कर अपना घोंसला बना रही थी, उसी समय हमे यह ख्याल आया कि चिड़िया को तिनका चोंच से काटने में इतनी मेहनत करना पड़ रही है, इसलिए हमने कैंची से झाड़ू को काट दी और तीनके को अलग कर दिया । देखते ही देखते सारा तीनका चिड़िया अपनी चोंच में दबाकर ले गई। बच्चो की बात सुनकर, माँ एक हाथ मे कटी झाड़ू और दूसरे हाथ से बच्चो को दुलार करने लगी ।

#विजयसिंह चौहान

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि  ५ दिसंबर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर हैl आप वर्तमान में इन्दौर(मध्यप्रदेश)में बसे हुए हैंl इन्दौर शहर से ही आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की हैl आपका  कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl सामाजिक क्षेत्र में आप सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा व लेख हैl उपलब्धियां यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता में मगन हैंl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।