प्रार्थना-पत्र 16

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सेवा में,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
दिनांक: 24 फरवरी 2020
विषय: नागरिकता संशोधन सीएए कानून के पक्ष में

माननीय महोदय
जय हिंद!

  आदरणीय माननीय सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी आपकी कृपादृष्टि व आशीर्वाद से मुझे मेरे विभाग सशस्त्र सीमा बल एसएसबी महानिदेशक कार्यालय गृह मंत्रालय भारत सरकार से दिनांक 28 जनवरी 2020 का लिखा हुआ एक पत्र प्राप्त हुआ है।जिसमें मुझे अवगत करवाया गया है कि पदयात्रा रैली हेतु अनुमति देना सशस्त्र सीमा बल से संबंधित नहीं है।जिस पर कमांडेंट प्रचालन के हस्ताक्षर हैं।
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी मैं मानता हूँ।किंतु एसएसबी के अधिकारियों ने मुझे पीड़ित-प्रताड़ित एवं उत्पीड़ित क्यों किया?इस प्रश्न का संबंध तो एसएसबी से है।जैसे मुझे तत्कालिक सर्कल सर्कल आर्गनाईजर प्रदीप कुमार गुप्ता ने क्यों पीटा था? जिसके कारण मुझे मनोरोग चिकित्सालय में ले जाया गया था।उसने अपनी दूरबीन टूटने के पैसे एसएसबी के स्वयंसेबकों से क्यों बसूले थे? जिसकी आज तक विभागीय जांच क्यों नहीं की गई? मुझे बिमारी और छुट्टी में ही मेंटल हेल्थ एक्ट, 1987 अर्थात मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 का उल्लंघन कर दूरगामी स्थान लेह लद्दाख क्यों स्थानांतरण किया गया था? वहां सेना के मेड़ीकल बोर्ड के डाक्टरों की दिशा निर्देशों का उल्लंघन क्यों किया था? मुझे लेह तक अपना सामान भेजने का टिए क्यों नहीं दिया था? मुझे मेरी मेड़ीकल ट्रेनिंग गवालदम का प्रमाण-पत्र क्यों नहीं दिया था? मुझे वेतन ना देकर आईअएसआई से वेतन मांगने के लिए और देशद्रोह का आरोप तत्कालिक सर्कल आर्गनाईजर राकेश कुमार,सब एरिया आर्गनाईजर एल आर शर्मा और एरिया आर्गनाईजर बी के आनंद ने क्यों और किस आधार पर लगाए थे? मुझे शरीरिक मारना और सरकारी पिस्तौल से मुझे माँ बहन की गाली देना एवं थप्पड़ मारने की विभागीय जांच के स्थान पर मुझे बिना वेतन राजस्थान और फिर गुजरात स्थानांतरण क्यों कर दिया था? वहां पर तपेदिक रोग के होते हुए भी सरकारी मैस से मेरा खाना बंद करना और जिला जेल जामनगर में कैद काटने के बावजूद मुझे संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना और मेरे प्रश्नों के आज तक उत्तर ना देना, देशद्रोह का विभागीय आरोप के बावजूद मेरे घर से 250 किलोमीटर दूर पुंछ के आतंकवादग्रस्त सुरणकोट क्षेत्र में नियुक्त कर मुझे जान से मारने का षड़यंत्र क्यों रचा था? मुझे 02 वर्ष प्रोवेशन पीरियड पूरा करने के बाद भी कन्फर्म क्यों नहीं किया और आज भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सकों के बोर्ड द्वारा जारी स्वस्थ होने के प्रमाणपत्र के बाद भी मुझे पागल की पेंशन क्यों दे रहे हैं? इसके अलावा वर्तमान महानिदेशक कुमार राजेश चंद्रा आईपीएस द्वारा मेरे मन की बात क्यों नहीं सुनना तो आपके साथ संबंधित हैं? ऊपरोक्त उत्तर देना क्या आपका कर्तव्य नहीं है?
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व सशक्त गृहमंत्री जी आपको स्पष्ट बताना चाहता हूँ कि उस समय एसएसबी में नौकरी को कन्फर्म करने अथवा स्थानांतरण करने या रुकवाने के लिए भारी भरकम कीमत चुकाने की व्याप्त कुप्रथा प्रचलन में थी। जो शायद अंगरेजों के समय से चली आ रही थी।वह कुप्रथा थी कि कर्मचारी या तो मूँह मांगा धन दे या अपनी धर्मपत्नी को उच्च अधिकारी विशेष रूप से अस्सिसटेंट डारयरेक्टर एडम कर्ण सिंह के बैडरूम में उसकी कामवासना पूर्ति हेतु भेजे अन्यथा विभिन्न प्रकार की पीड़ा-प्रताड़ना एवं उत्पीड़न सहन करे। जिनका विरोध करने पर मैं आज भी 26 वर्षों से निरंतर दण्ड भोग रहा हूँ, अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी आप ही बताएं कि नो वर्क नो पे नियम क्या बिमार कर्मचारी पर लागु होता है?क्या कर्मचारी पर न्यायालय द्वारा दी गई सूक्ष्म राहता का भी उल्लंघन किया जाता है?
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी मैं आपके माध्यम से वर्तमान एसएसबी विभाग के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्रा आईपीएस जी जो मेरी व्यथा नहीं जानते से अपने मन की बात सुनाने के लिए कई बार आग्रह कर चुका हूँ। किंतु वह मुझे सुन नहीं रहे हैं। इसलिए आपसे विनम्र आग्रह है कि उन्हें आदेश जारी करें कि वह मेरे मन की बात सुनें और मेरे साथ न्याय करें। क्योंकि यह उनसे ही संबंधित है।जिसके लिए माननीय जम्मू कश्मीर की फुल बैंच ने भी एसएसबी द्वारा की गई अपील में उनको निर्देश किया हुआ है कि प्रार्थी की बात सुनकर कानून के अंतर्गत उचित कार्यवाही की जाए।जबकि मानसिक स्वस्थ कर्मचारी को पागल की पेंशन देना आप द्वारा दिव्यांगता संशोधन अधिनियम 2016 का घोर अपराधिक उल्लंघन है।
इसी प्रकार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अधीन जम्मू-कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी मुझे सूचित किया कि पदयात्रा से उनका कोई संबंध नहीं है।जबकि मेरे 207 पन्नों पर मांगी गई राय व परामर्शों पर कई वर्षों से चुप्पी साधी हुई है।वह मेरे 207 पन्नों में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर क्यों नहीं दे रहे? जबकि आपकी सरकार उक्त प्राधिकरणों पर अरबों रुपये वार्षिक खर्च कर रही है।
इसलिए सम्पूर्ण स्वच्छ एवं भ्रष्टाचारमुक्त भारत बनाने के लिए खाई सौगंध को पूरा करने एवं मुझे मेरा राष्ट्रीय कर्त्तव्य निभाने हेतु शीध्र अति शीध्र पदयात्रा की अनुमति देकर कृतार्थ करें सम्माननीयों जय हिंद

प्रतिलिपि सेवा में 1 माननीय मंत्री व सांसद डा जितेंद्र सिंह जी शमशेर सिंह मन्हास जी एव जुगल शर्मा सहित
2 माननीय डीसी जम्मू और एसडीएम अखनूर व एसडीएम खौड़ एवं कई अन्यों को सूचना एवं शीघ्र उचित कार्यवाही हेतु अणुडाक अर्थात इमेल द्वारा सादर भेज दी हैं सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
एसएसबी का पूर्व पीड़ित-प्रताड़ित कर्मचारी,
आरएसएस के स्वयंसेवक, पत्रकार, चिंतक, आलोचक लेखक, शोधकर्ता एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी,
समीप महावीर मंदिर खौड़ कैंप,
डाकघर व तहसील: खौड़
जिला: जम्मू
प्रदेश: जम्मू व कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।