रोटी की तलाश में

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shailesh gupt
सौन्दर्य की बात
मत करो
बेमानी है।

भूख
भूखी हो जायेगी
प्यास
प्यासी हो जायेगी।

यथार्थ में सौन्दर्य नहीं होता
नयी परिभाषाएँ
बता रही हैं।

आदमी की पीड़ा को
अधिक से अधिक कुरेदना है
प्रकृति और प्रेम के रंगों को
संघर्ष के कृत्रिम रंगमंच में
मात देनी है।

रोटी के नाम पर
नया सामन्तवाद
बाँहें फैलाये खड़ा है,
श्रम लथपथ है
किताबी कीड़े
नयी परिभाषाएँ
गढ़ने में मगन हैं।

श्रम का
यह बलिदान
व्यर्थ नहीं जाने देंगे
भूखा
रोटी की तलाश में
आसमान नहीं उठा लेगा,
किन्तु इन बेसिर-पैर की
जीवित दुरात्माओं का
भाग्य चमका सकता है।

देखना
वे अभी फिर
भूख-भूख चिल्लाएँगे,
कहीं तिल का ताड़
बना रहे होंगे,
नयी आज़ादी के नये ‘महानायक’।

#डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’
परिचय
नाम:डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’
फतेहपुर (उत्तरप्रदेश)
शिक्षा:
परास्नातक (प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विज्ञान), पी-एच. डी. (पुरातत्व विज्ञान), यूजीसी-नेट (पुरातत्व विज्ञान), एम.जे.एम.सी.(पत्रकारिता एवं जनसंचार), बी.एड., डिप्लोमा इन रसियन लैंग्वेज़, डिप्लोमा इन उर्दू लैंग्वेज़, ओरियन्टेशन कोर्स इन म्यूजियोलॉजी एण्ड कन्ज़र्वेशन।
संपादन:
*‘उन पलों में’ (रागात्मक कविता संकलन)
*‘आर-पार’ (छन्दमुक्त सामजिक कविताओं का संकलन)
*‘कई फूल – कई रंग’ (देश भर के बासठ रचनाकारों का संकलन)
*’डॉ. मिथिलेश दीक्षित का क्षणिका-साहित्य’ (क्षणिका-साहित्य का प्रथम समीक्षा ग्रन्थ)
*’बिन्दु में सिन्धु’ (क्षणिका-संकलन)
*अन्वेषी-2007, *अन्वेषी-2008, *अन्वेषी-2009-10, *अन्वेषी-2011-12 तथा *अन्वेषी-2014
(संस्था ‘अन्वेषी’ के वार्षिकांक)
*अचिन्त साहित्य दीपावली क्षणिका विशेषांक -2017
*क्षणिका काव्य के हस्ताक्षर ( डॉ. मिथिलेश दीक्षित जी के साथ)
प्रकाशन:
डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’ के सौ शेर
देश-विदेश के हिन्दी, उर्दू तथा अंग्रेज़ी के विविध पत्र-पत्रिकाओं-वेबपत्रिकाओं, संकलनों तथा शोध-संकलनों में।
अनुवाद-
चीनी और फ्रेंच भाषाओं में।
कार्यक्षेत्र-
सृजन, संपादन, समीक्षा तथा साक्षात्कार लेखन के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता, इतिहास तथा पुरातत्व विषयक विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठियों, संगोष्ठियों, शोध-संगोष्ठियों, सम्मेलनों तथा कार्यशालाओं में सहभागिता और प्रस्तुतीकरण।
सम्मान:
1- बेकल उत्साही सम्मान-2017
(गुफ़्तगू संस्था, इलाहाबाद द्वारा)
2- कला रत्न एवार्ड-2011
(‘काव्यांजलि’ संस्था, कानपुर द्वारा)
3- सृजनशीलता सम्मान-2017
(फतेहपुर विकास मंच द्वारा)
4- रामकृष्ण कला-साहित्य सम्मान-2010
(इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा)
भाषा ज्ञान:
हिन्दी, अग्रेंज़ी ,संस्कृत, रूसी, गुजराती, उर्दू तथा भोजपुरी।
सन्दर्भ:
अध्यक्ष- अन्वेषी (साहित्य एवं संस्कृति की प्रगतिशील संस्था, फतेहपुर)
सलाहकार- गुफ़्तगू (हिन्दुस्तानी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका, इलाहाबाद)
संरक्षक- मौसम संस्था, पलामू
सलाहकार संपादक- मौसम, शब्दगंगा तथा हमारी पहल (हिन्दी वार्षिकी, पलामू, झारखण्ड)
परामर्शदाता- साहित्य सृजन मंच, बिसवाँ, सीतापुर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।