एक तस्वीर…

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स्त्री का एक भी पल स्वयं का नहीं है ,
स्त्री जिसका कुछ भी नहीं है अपने लिए,
हमेशा सब कुछ किया जिसने सबके लिए,
जैसे पूरा आकाश मिल जाता है,
जब स्त्री को मातृत्व का सुख मिल जाता है,
उसका एकांत क्षण नहीं होता अपने लिए,
स्त्री जब मां बनती है,
न जाने कितने सपने बुनती है,
सब कुछ लुटा देती है औलाद पर,
अपना प्यार,अपना आज और कल,
अपने जीवन का हर क्षण हर पल
कहां से लाती है इतना त्याग,
इतना प्रेम इतना समर्पण,
क्या कुछ नहीं गुजरता है उस पर,
जब वह होती है उदास,
नहीं होता जब कोई उसके पास,
सुनने को उसकी तकलीफें उसकी ख्वाहिश,
बहुत कुछ दब जाता है, किसी कोने में,
जो नहीं दिखता उसे भी,
जो रहता है उसके सबसे करीब,
आखिर क्या मिलता है उसे स्त्री होकर
कितना कुछ पाना चाहती हैं वो आंखें
जो हमेशा दूसरों के लिए सपने देखतीं हैं,
सचिन राणा “हीरो”
हरिद्वार उत्तराखंड

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।