संगिनी : महिलाओ की सम्पूर्ण हिन्दी मासिक पत्रिका

Read Time2Seconds

बाल विशेषांक : दिसंबर २०१९

संगिनी हिन्दी पत्रिका का बाल विशेषांक देखते ही समझ गए की ये हल्लम हल्लम हाथी ,घमंडी सियार ,होम वर्कको छुट्टी दे दो ,व्यंजन बच्चो ने बनाए हे,वही मुख पृस्ठ पर एक सुंदर टेलेंटेड बच्चे की तस्वीर के साथ दिसंबर २०१९ का अंक प्राप्त हुआ । हमे पत्रिका की समीक्षा लिखने की जानकारी नहीं हे फिर भी हमारी कोशिश कामियाब रहे एसी ऊमीद के साथ ये प्रस्तुत कर रहे हे।
हमने बच्चो के लिए लिखी गई एक किताब श्री राजकुमार जैन राजन जी की हिन्दी पुस्तक की समीक्षा लिखने का विनम्र प्रयास किया था। उनकी पुस्तक “ खोज़ना होगा अमृत कलश “ का हिन्दीसे गुजराती मे अनुवाद कर ने का अवसर प्रसिद्ध साहित्यकार राजकुमार जैन राजन जी से पाया हे,उसका भी पहले हमने समीक्षा लिखा था।
खोज़ना होगा अमृत कलश की पुस्तक गुजराती मे पब्लिश भी हो चुका हे।
यहा बता ने का कारण यह हे की बाल विशेषांक पर श्री राजकुमार जैन का तस्वीर भी दिख रहा हे,उसी तस्वीर ने हमे उनकी जानकारी देने को प्रेरित किया हे।
आप को मालूम होगा की यह संगिनी पत्रिका की मुख्य संपादिका माधुरी घोष एक तेजस्वी महिला हे। उनके साथ जाने माने साहित्यकार राजकुमार जी भी हे। एक और नाम गण देवीकर तथा सुरजीत घोष का भी देखने कोमीला हे। लेकिन मे राजन जी का ही जिक्र करूंगा उनसे मे पाँच सालो से परिचित हु ,उनके साहित्य से भी परिचित हु । राजकुमार फ़ाउंडेशन अकोला चितोदगढ़ के वे अद्यक्ष हे ,हिन्दी साहित्य के लिए वे बहुत ही उम्दा कार्य कर रहे हे,हमे उनकी संस्था की ओर से श्री अंबालाल हिगड़ बाल साहित्य पुरस्कार रुपए २१००/की राशि,शाल और पुष्पमाला के साथ अर्पित किया गया हे।साहित्य दस्तक समीर हिन्दी मासिक पत्रिका भोपाल से हिन्दी मे पब्लिश होती हे उस पत्रिका से भी हमे चितोदगढ़ मे दूसरा सम्मान भी प्राप्त हुआ हे। हम उनकी संस्था और उनकी साहित्य के प्रति भावना का स्वागत करते हे। क्यू की आज की भाग दौड़ की ज़िंदगी मे बच्चो के लिए सोचने का किसी के भी पास समय नहीं हे,
राजकुमार जी इस पत्रिका के माध्यम से अपनी बात रखते हुए बताते हे की,”संस्कार सिंचन बच्चो मे एक अच्छा साहित्य ही कर सकता हे। इस अंक मे मोती रूपी रचना ओका चयन कर के इस बाल विशेषांक को मोती की तरह चमकाया हे। वे बताते हे की,बालक ईश्वर की दी गई अनुपम कृति हे,जीवन की धारणा ,परंपराए ,संस्कृति का शासवत मूल्य हे। किन्तु वे चिंतित हे,की आज की आधुनिक दौड़ मे सब कुछ लुप्त हो गया हे। बच्चो की दुनिया आधुनिक उपकरण मोबाइल ,व्हाट्स अप्प ,फेस बूक ,ट्विटर ,इन्टरनेट ,कम्प्युटर मे सिमट गया हे।
माधुरी घोष संपादिका ‘संगिनी’बताती हे की,बच्चोकी नकारात्मक गति विधियो को रोक्न होगा,उनकी बात से मे सम्मत हु,क्यो की नकारात्मक सोच कमजोर बनातीहे,जब की सकारात्मक सोच कामियाबी दिलाती हे,आगे बढ़ती हे,सफलता की चाबी हे। कम करने का हिम्मत बढ़ती हे।
माधुरी जी ने दूसरी अच्छी बात बच्चो की स्वतन्त्रता की बताई हे। आज मात पिता अपने बच्चो को स्वतन्त्रता नहीं दे रहे हे,क्यू की उनकी ख़्वाहिश ऊंची होती हे,उन्हे जिस विषय मे रस हे उसी विषय मे बच्चे को पढ़ते हे,नहीं की बच्चे की। बच्चे पर बोज डालते हे,इससे बच्चा मानसिक रूप से तनाव मे रहता हे,आज हम अखबार मे पढ़ रहे हे की बच्चे अधिक आत्म हत्या करने लगे हे। आज ८० % लोग डिप्रेसन से आत्म हत्या कर रहे हे। हर ४० मिनिट मे एक आत्म हत्या हो रहा हे,हमारे गुजरात की बात करे तो २०१६ मे ७७३५ आत्म हत्या ये हुई हे,उसमे ५५६ विध्यार्थी ओ ने आत्म हत्या की हे। मेरी पास और प्रदेश की जानकारी नहीं हे। लेकिन अखबार से पता चलता हे की,आज कल युवा सबसे ज्यादा आत्म हत्या करने लगे हे। युवा विध्यार्थी हताशा से आत्म हत्या कर रहे हे,उसे रोकने की हम सभी की जिम्मेवारी हे। गुजरात मे १५ से २९ साल के युवा सबसे ज्यादा आत्म हत्या कर रहे हे। २०१३ मे ११७ विध्यार्थी ओ ने आत्म हत्या कर ली थी। उसका कारण परीक्षा मे नफ़स होने का या फिर मार्क्स कम आने के दर से आत्म हत्या कर लेते हे। उनकी उम्र १२ से १४ तक की होती हे। विश्व मे ५.७० करोड़ लोग हर साल आत्म हत्या कर रहे हे,जिसमे १५ % आत्म हत्या हे ।
इस अंक मे रेशम के धागे की बात साधना श्रीवास्तव ने उम्दा रीति से राखी हे,जिस बच्चे की जन राखी बांधने वाली लड़की ने बचाई थी,उस लड़की को देखकर बच्चे की माँ गुस्से मे आती हे,सोनू की माँ कहती हे की उस मनहूस लड़की से तुमने क्यू राखी बँधवाई ?लेकिन जब सोनू बताता हे की इस लदकिने स्कूल मे एक बार जन बचाई थी तब उसकी माँ को पसटवा होता हे। ,इस अंक मे बच्चो की अच्छी ग्रोथ के लिए जानकारी एक लेख मे दी गई हे। अच्छी ग्रोथ के लिए बच्चो को आइरन से भरपूर खुराक देना चाहिए । बच्चो की सुरक्षा के लिए साइबर रूल्स बनाए गए हे। बच्चो को जागरूकता से मीडिया का उपयोग कने को कहा हे। इमरजनसी के लिए बच्चो के पास मोबाइल होना जरूरी माना गया हे।
कवि डॉ घमंडी लाल जी ने ईएसए हिंदुस्तान सोचा हे की,जहा बच्चे पारस हो,मधुर कोरस हो,भागवत गीता हो,राम चरित हो ।
डॉ विनीता ने पोलिथीन से मुक्ति की बात कि हे,पोलिथीन पर्यावरण को नुकसान पाहुचता हे,उसका उपयोग नहीं करने की बात अपनी रचना के माध्यम से की हे।
चंद्रप्रभा बच्चो के विकाश के लिए बताती हे की,पिताजी ने अपने बच्चो की अवहेलना नहीं करनी चाहिए ,पिता को अपने बच्चे की प्रति मन होता हे,बच्चो ने पिताजी की यागना का पालन करना चाहिए । उनकी सेवा सुश्रूषा करनी चाहिए,नहीं की वृद्धद्धावस्था मे वृद्धाश्रम मे छोड़ना । जुगनू को निशु तारा समझ रहा था ,वो चमकीला होता हे,उसे पसंद था,लेकिन नानि ने बच्चे को समझाया ,की उसे खुली हवा मे छोड़ना चाहिए,नहीं तो बेचारा मर जाएगा ।
अपने बच्चो की बर्थ दाय पार्टी भरपूर रोमांस से मनानी चाहिए ये मे नहीं कहता हु,इस अंक मे बताया गया हे की पार्टी मे बच्चो को ज्यादा बुलाना चाहिए,बड़ो को बाद मे ।
डॉ श्री प्रसाद जी की दो कविता ये हल्लम हल्लम हाथी चल्लाम चल्लाम ,और थल्लम थल्लम जेसे मनोरंजक करने वाली बाल कविता को मुख पृस्ठ पर स्थान दिया गया हे,सुबह कविता मे सूरज की किरणों से अंधकार चला जाता हे और वो बात काही हे। प्रकाश होता हे जो अपने जीवन को प्रकाशित करता हे।
विना शुखिया ने महत्वपूर्ण बात बच्चो को होम वर्क से छुट्टी दे दो मे काही हे ,बच्चे को होम वर्क देने से उसका विकाश होता हे,ये बात सही पाई गई हे,होम वर्क का होना जरूरी बताया हे।
डॉ फ़ाहिम ने अपनी कविता मे बच्चो की मीठी खिल खिलाहट कहा हे।
सुरेन्द्र गुप्त ने तिरंगा नहीं झुकेगा की बात बच्चो तक देश प्रेम जताने के लिए पहुचई हे। चिंकी का शहर मे अधिक ध्यान रखने पर भी बीमार बताया हे,जब की चिंटू का स्वास्थ्य गाँव मे रहने पर भी बहुत अच्छा हे,उसका करंगनव मे प्रदूषण नहीं हे। यही बात मिरा ने अपनी लघुकथा के माध्यम से की हे।
डॉ।संदेश त्यागी ने मनोरंजक कविताए दी हे। बच्चो की पसंद पतंग को अपनी रचना मे स्थान दिया हे। पतंग और जंगल मे राजा( शेर )के पीछे भेंसा भागा जेसी अच्छी बच्चोकों मन भवन कविता दी हे।
रेणु सेनी ने तिरंगा तिरंगा और पकी पतंग के माध्यम से प्रेम और भाईचारा की बात की हे।
राजपाल सिंह ने अपनी रचना मे मेला ल सुंदर वर्णन किया हे।
मेराज राजा ने परी कहा हे ? दूसरी कविता मे बिल्ली और चूहे की बात की हे। नाता जोड़ने की बात की हे। चूहे खाना छोड़ दे,बिल्ली को कहा हे।
डॉ।गोविंद शर्मा बताते हे की,बच्चो कोयदी सुयोग्य नागरिक बनाना हे तो उन्हे अच्छा बाल साहित्य दीजिये,डॉ शर्मा जी को बाल साहित्य के लिए केंद्रीय साहित्य अकादमी दिल्ली ने सम्मान से विभूषित किया हे।
ॐ प्रकाश क्षत्रिय ने अपनी कहानी मे घमंडी सियार की बात की हे,सेमलु सियार और गबरू घोड़े के माध्यम से बताया हे की घमंड नहीं करना चाहिए॥ उपदेशात्मक बात बच्चो तक पाहुचने का एक अच्छा प्रयास उनके द्वारा किया गया हे।
संगिनी डेस्क मे बच्चो को सहानुभूति नहीं लेकिन दोस्तो की जरूरत बताई हे,उन्हे पेड़ा करना नहीं चाहिए,उन्हे बात चित मे शामिल करे,गतिविधियो से गुरु और शिस्य को जुडने कहा गया हे ।
डॉ आरती बंसल पूछती हे की,आसमान नीला क्यो?फूल पोंधे ,तितली बड़ा छोटा क्यो?प्रशनार्थ कर के ही छोड़ दिया हे। उत्तर भी ड्ने का प्रयास किया होता तो अच्छा रहता।
सोहनलाल द्विवेदी ने चिड़िया बनकर स्वतंत्र रहने के लिए चिड़िया बन जाना पसंद किया हे,भोले भोले कबूतर की गुटर घू का वर्णन किया हे,इस अंक मे कार्टून भी हे। क्राफ्ट आइडिया भी दिया गया हे। बच्चे बनाए व्यंजन मे फ्रूट चाट ,भेल पूरी ,वेज सेंद विच मटर पनीर की जानकारी दी गई हे।
मसींदर बापू भिसे ने ‘मंगल यान की दुनिया’कहानी मे शेरु और चींटिया का बारिश के तूफान मे पाहुचने का उम्दा विचार रखकर बच्चो को प्रेरित किया हे,चोटी चीज भी बहुत ही बड़ा कम कर जाता हे,शेरु को भी चिंकी याने चींटी ने हरा दिया ,और गुफा मे रहने के लिए अनुमति भी ले ली।
कुँवर बताते हे की,बाल पत्रिका बच्चे भी पढ्न चाहते हे,बाल पत्रिका इन्हे ललचाती हे।
डॉ धारा वल्लभ ने बच्चो को धीर वीर बनने के लिए कहा हे,
डॉ विकाश दवे ने अपनी अपनी छुट्टिया केस मनाए उसकी दादाजी और बच्चे के माध्यम से दी हे।
इंजी।आशा वर्मा ने गुजजु के माध्यम से जंगल मे स्वतन्त्रता की बात की हे।
वंदना गोपाल शर्मा बताती हे की,स्वच्छता मे भलाई हे,
डॉ श्री कृष्ण चन्द्र तिवारी की दो कविताए दादाजी के दांत और कंटक थाइया धुन मचाई की बात की हे। चिड़िया और मछ्ली के माध्यम से कहानी मे सुबह सलौनी ,छम छम होती हे जल्दी उठने की बात श्री अहम प्रकाश भोपाल के द्वारा काही गई हे।
डॉ बंसल ने एलियान के स्वप्न की बात की हे,बच्चा एलियान की तरह सोचता हे,बदलो मे घूमना ,स्कूल नहीं जाना घर बैठकर खाना खाकर घूमना चाहता हे। लेकिन वो स्वप्न हे।
किर्ति श्री वास्तव आग्रा ने , माँ को सबसे प्यारी बताया हे।
डॉ नलिनी ने पार्क का वर्णन किया हे।
सुरजीत मन जलैया ने अपनी कविता मे हवा को दूषित नहीं करने की बात की हे। आने वाले कल मे बाल दिवस केसा होगा ,आज के महोल को देखकर सोचा हे,देश प्रगति के नाम पर पेड़ कट रहे हे,पर्यावरण खराब हो रहा हे,ताजी हवा नहीं होगी तो चिड़ियो को भी जीना केसा मुसकिल होगा उसकी कल्पना की गई हे।
सुरेन्द्र सिंह ने हम सफर बच्चो के पुराने खेल के बारे मे बताया हे। आज मोबाइल खिलौना बन गया हे,
महेंद्र जैन ने पुस्तक को बच्चो का सबसे प्यारा प्यारा दोस्त बताया हे, पुस्तक से विद्या धन की प्राप्ति होती हे,हर मुसकिल आसानहो जाता हे।
डॉ शशि को बच्चा बनना बड़ी मुसीबत लगता हे,क्यो की सुबह मे एनआईडी से उठना,गर्मी सर्दी मे रहना ,लिखना पढ़ना ,अव्वल नंबर ले आना,बात बात मे डांट पड़ना ,ये बच्चे बनने मे मुसीबत लगता हे।
अध्यापक ॐ प्रकाश क्षत्रिय बाल साहित्यकार का साक्षात्कार मचींदरभिसे सतारा ने किया हे,ॐ प्रकाश बाल कहानी,लघुकथा और कविता लिखते हे,उनके बहुत सारे पुस्तक प्रकाशित हे,१११ कहानियोका आठ भाषाओ मे अनुवाद हुआ हे,वे मध्य प्रदेश मे स्कूल मे अध्यापक हे,बाल साहित्य की रुचि नवमी कक्षा मे थे तब से हुई हे,बाल साहित्य मे मौलिकता की बात की हे,आज की सिक्षा मे बहुत अंतर हे,तकनीकी बालक बन गया हे,बाल साहित्य पसंद इस लिए हे की,उसमे जिग्नासा ,गति और आनद ,का लय मिलता हे,जब की स्वतन्त्रता आँय किसी भी विधा मे नहीं हे। बच्चो तक अपने मात पिता बाल साहित्य पाहुचने नहीं देते हे,बच्चो तक पाहुचने के लिए,विध्यालयों मे प्रत्येक शनिवार बाल सभा का आयोजन होना चाहिए ,आलोचना करना चाहिए,यह बात ॐ प्रकाश जी ने अपने साक्षात्कार मे मसींदर भिसे जी को की हे। बाल साहित्य को छाप नि हे,आज कल साहित्य केवल पुरस्कार की दौड़ मे लिखा जा रहा हे। ॐ प्रकाश जी को बहुत सारे पुरस्कार प्राप्त हुये हे,बच्चो को अच्छा साहित्य पिरोसने की बात की हे,मसींदर उनकी साथ साक्षात्कार से अभिभूत हो गए हे,बरिकाई से जानकारी देने का प्रयश उन्हे छु गया ।
डॉ अखिलेश शर्मा ने बेटी बचाओ कविता दी हे।
श्री अन्नत कुशवाहा बताते हे की,बाल साहित्य मे बालक की अपेकषा और उसकी भावुकता को स्थान देना होगा।
डॉ शेषपाल ने स्वस्थ मस्त रहने की बात अपनी कविता मे की हे।
बाल स्वरूप राही ने नेहरू चाचा को पसंद गुलाब _चंदा मामा की कविता दी हे।
शुशिला शर्मा ने नए साल के स्वागत की बात अपनी कविता मे की हे।
रजनीकान्त कहरीय ने बच्चो के प्रति अभिभावक की नजर से देखना होगा की बात अपने लेख मे की हे,
बाल कवि बैरागी ने अपनी कविता ‘विश्वश पंछी के माध्यम से और सागर की यात्रा मे नदी के माध्यम से समुन्द्र बन जाने की बात काही हे।
दैविक रमेश ने नीम के पते के से माध्यम से दूसरे को मदद की बात की हे ।
अंत मे संपादक माधुरी घोष संपादक को एसिया अवार्ड से गुजरात के अहमदाबाद मे सम्मानित किया गया उसकी सुंदर तस्वीर नजर आती हे। ‘संगिनी’ के माध्यम से विध्यार्थी ओ के लिए वंदना विध्यालय मे बड़ौदा मे बोरवेल,आर ओ प्लांट एवं वॉटर कूलर की व्यवस्था की गई उस समाचार देखकर साहित्य और सेवा का संगम कितना सुंदर रीति एसआर संगिनी फ़ाउंडेशन माधुरी घोष के माध्यम से देखने को मिलता हे। यह एक उत्तम उदाहरण हे। संगिनी फ़ाउंडेशन पिछले पाँच सालो से वडोदरा जिले के गांवो मे समाज सेवा निरंतर कर राही हे,कितना सुंदर कम कर राही हे। पनि व्यवस्था का उदघाटन वडोदरा शहर की मेयर जिगीशा बेन शाह जी ने (शेठ) ने किया हे,ये और खुशी की बात हे,संगिनी फ़ाउंडेशन महिला ओ के विकाश के हेतु कार्य कर राही हे,वे प्रेरणा रूप हे। यह बात पीछे के भाग मे अंत मे ढेखने को मिला बहुत ही खुशी हुई,हम इन्हे हार्दिक बधाई देते हे। यह फ़ाउंडेशन सामाजिक,संस्कृतिक,और शैक्षणिक क्षेत्र मे कार्यरत हे,मेरी यह राय हे की अन्य साहित्यिक संस्था ओ ने भी एसी समाज सेवा करने प्रेरित होना चाहिए।
‘संगिनी’ बाल विशेषांक की समीक्षा लिखने का अवसर हमे प्रदान हुआ इस के लिए हम माधुरी घोष संपादक,और राजकुमार जैन सह संपादक जी का आभार प्रकट करते हे।
उसका दो मासिक लवा जम ६०० रुपए रखा गया हे। सस्यता शुल्क चेक ‘संगिनी हम सफर ‘नाम से बनाकर इस पते पर भेजना हे,
पता:sअनगिनी २२,तिलक नगर ,किसन वाडी,पुलिश स्टेशन के पास ,नव जीवन आजवा रोड ,वडोदरा,३९००१९ ।

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

0 0

matruadmin

Next Post

मैं भी बन जाऊँ पतंग

Wed Jan 15 , 2020
उड़ती पतंग को देखकर मन की अभिलाषा यही मैं भी बन जाऊँ पतंग पर ऐसी जिसकी डोर किसी के हाथ न हो जो जब चाहे ऊँचे आकाश से गिरा दे हमें पतंग के डोर हो स्वतंत्र जो पतंग जैसे उड़े बेखबर कभी आसमान के परे हमें उड़ना है हवाओं के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।