सायरी

0 0
Read Time2 Minute, 43 Second

इस तरह कैसे मैं रोकू खुद को उन से बात करने को,
मैं उस तरह उन के नम्बरो को देख लेता हूं,
उन में छुपी उन की यादों को ढूंढ लेता हूं,
सायद वो भी बैठे होगे मेरी याद में तनहा,
तभी चाँद के पहले मुझे याद कर लेते है।

कभी इस तरह हो जाता हूं तन्हा याद में उन की यादों में,
कभी देखु उन की फ़ोटो को तो कभी उनके नंबर को।

कभी छोड़ जाते है तन्हा मुझे यादों को देकर के,
बोल देते है इन्ही के सहारे आज की रात काट लो जी,
कल को फिर चाँद निकले गा उस के साथ ही आये गे,
ये बादल भी क्या रोके गे हमे तुम से यू मिलने से,
बादलो को भी चीर के तेरा दीदार कर लेगे।

आज उस पगली ने सच मुच रुला दिया,
परिवार की खुसी के लिए मुझ को भुला दिया।

तुम को जाना है तो जाओ,
परंतु इस दिल से तुम्हारी यादो को कैसे निकालू।

तुम को अगर जाना ही था,
तो इस दिल में आई ही क्यूँ थी।

जब आईना था तो सभी मुझ से अपना हाल पूछते थे,
आज टूट गया हूं तो कोई देखता भी नही है।।

आज भी मैं तुम्हारे नम्बर पे फ़ोन कर लेता हूं,
काश किसी दिन तुम को भी मेरी याद आये,
औऱ तुमहारे होने का अहसाह फिर से हो जाये।

#राहुल चौधरी

परिचय: राहुल चौधरी जी की जन्मतिथि 19 जनवरी 1995 और जन्मस्थली रामनगर-वाराणसी है। पिताश्री राजेश कुमार एवं माताश्री सुमन देवी के लाडले सुपुत्र श्री चौधरी साहब कोमल हृदय एवं धनी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। रामनगर से ही इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से स्नातक किया। इसके अलावा एनसीसी,एन०एस०एस० और स्काउट गाइड की भी शिक्षा प्राप्त की। लेखन कार्य,बैटमिंटल और कैरम के शौकीन श्री चौधरी जी की विधाएं कविता एवं लघुकथाएं हैं। वर्तमान समय में आपका कार्यक्षेत्र अध्यापन, लेखन के साथ-साथ डीएलएड (बीटीसी) के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मां

Mon Oct 21 , 2019
हर संतान मां के लिए है प्रभु का वरदान संतान की खातिर मां अपनी भी दे देती है जान संतान सुखी तो मां सुखी संतान दुखी तो मां दुखी संतान की हर धड़कन में बस, मां की धड़कन जान मां हर दुख सहकर भी देती मीठी मुस्कान सच पूछो तो […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।