साहित्य संगम संस्थान के सचिव आद तरुण सक्षम जी के द्वारा जन स्वर पत्रिका का विमोचन

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जनस्वर पत्रिका के प्रबंध सम्पादक नवीन कुमार भट्ट नीर ने बताया है कि साहित्य संगम संस्थान के महासचिव आद० कविराज तरुण सक्षम जी के द्वारा जनस्वर पत्रिका का आज मंगलवार 20/08/2019 को विमोचन किया गया । लोकतंत्र की प्रचंड जीत पर आधारित यह अंक लोकतंत्र के मानकों पर व हिंदी साहित्य में चार चाँद लगायेगा । निश्चित तौर से इस अंक में रचनाएं अपने आप में उर्जावान संदेश देती हैं । साथ ही नई सीख देती रहेगी यह अंक आज आप सबके बीच प्रस्तुत है । इसे पढ़कर अपनें विचार को साझा करते हुये संपादक मंडल सहित रचनाकारों को संबल प्रदान करें । आपके विचारों की प्रतिक्रिया से यह अंक बाग-बाग हो जायेगा । अपनें हर सोसल नेटवर्किंग में जिनका उपयोग आप करते है । वहाँ इस अंक को जरूर साझा करें, ऐसी प्रार्थना है।

इस ऑनलाइन विमोचन कार्यक्रम पर जनस्वर पत्रिका के विषय में सिरोही राजस्थान के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ छगनलाल गर्ग विज्ञ जी सृजनाधीक्षक साहित्य संगम संस्थान ने अपनी बात रखी “सुन्दर आवरण में सार्थक संदेश देती रचनाकारों की दिशा बोधक काव्य रचनाएं! जनस्वर पत्रिका के संपादक मंडल व रचनाकारों का हार्दिक अभिनन्दन!” डॉ भावना दीक्षित जी संपादक काव्यमेध ने शुभकामनाएं दी। कि ” मेला ठेला है लगा,संगम में उत्सव होय ।
लोकतंत्र की गूँज में ,जनस्वर भी चहुँओर ।
बहुत सुंदर पत्रिका बहुत बहुत बधाई संपादक मंडल और सभी रचनाकारों को ।”
वहीं साहित्य संम संस्थान अलंकरणशाला की संरक्षिका डॉ कुमुद श्रीवास्तव ने अपने अंदाज में कहा कि – “जनस्वर की गूँज उठ रही ,
संगम जगमगाया है।साहित्यनीति का पहला पड़ाव यह ,अभी जोश गरमाया है
“हाऊ इज़ द जोश ” पूँछते सम्पादक दल आया है ,पत्रिका हर माह अब निकले ,हमनें लक्ष्य बनाया है।” साहित्य संगम संस्थान की कोषाध्यक्षा आ०छाया सक्सेना प्रभु जी ने
कहा-“ऐसे ही अंक समय -समय पर बनाते हुए जन जागरूकता का अभियान चलाना चाहिए ।” वहीं इस जनस्वर के पत्रिका पर राजवीर मंत्र ने आह्वान किया कि साहित्यनीति साहित्य संगम संस्थान की पहल पर जनस्वर समसामयिक विषयों पर प्रकाशित होने वाली सामयिक पत्रिका है । लोकतंत्र की प्रचंड विजय पर आ०कविराज तरुण ने संपादक मंडल को ललकारा था कि कुछ तो ऐसा कीजिए कि जिससे हम साहित्यसेवियों का सपोर्ट और अभिव्यक्ति देश के लिए आगे आए । काफी समय से यह पत्रिका बनी हुई पड़ी थी । कुछ और शुभकामना संदेश आने शेष हैं । इधर बीच में ऐसा घटनाचक्र चला कि सब अस्त-व्यस्त सा हो गया था । इसीलिए जनस्वर के विमोचन में विलंब हुआ । पत्रिका में शामिल साहित्याकरों एवं संपादक मंडल को हार्दिक बधाई । कल अनुज नवीन माननीय प्रधानमंत्री जी कार्यालय के पत्र पर हर्षित हो रहे थे । अब तो आपके पास भी ब्रह्मास्त्र आ गया । आचार्य जी कल मॉरीशस से पधार रहे हैं । इसे प्रकाशित करवाकर प्रधानमंत्री जी को अविलंब भिजवाइए । वैसे मेल पर मैंने शुभकामना संदेश हेतु पत्रिका का लिंक भी साथ में लगाकर भेजा है ।” इस समारोह पर नेमलता ,टी आर चौहान, कैलाश मंडलोई,अनिता मंदिलवार सपना, सुनील अवधिया ,गीतांजलि ,नवल किशोर,राजेश कुमार शर्मा पुरोहित जी ने उपस्थित होकर विमोचन कार्यक्रम को सफल बनाया ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।